उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से उज्जैन को जल्द ही एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। उज्जैन को जल्द ही वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान मिलने जा रही है। नवलखी वन क्षेत्र के आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में एक वर्ल्ड क्लास “फॉरेस्ट ज़ू” विकसित करने की तैयारी चल रही है । यह ज़ू पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में बनाया जाएगा, ताकि पर्यटकों को जंगल जैसा वास्तविक अनुभव मिल सके।
वन मंडल अधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 300 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों को लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है । परियोजना की तकनीकी स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेजा गया था, जहां से इसे इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल चुकी है । अब प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि परियोजना की डीपीआर तैयार करने में वनतारा की तकनीकी सलाह ली गई है । भविष्य में उनकी भूमिका क्या होगी, इसका फैसला राज्य सरकार करेगी। यह परियोजना दो चरणों में विकसित होगी । पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘इंडिया फॉरेस्ट ज़ोन’ बनाया जाएगा, जहां भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में रखा जाएगा । यहां बड़े ड्राइव-थ्रू सफारी विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यटक बिना जंगल की प्राकृतिक सुंदरता को प्रभावित किए वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे।
दूसरे चरण में ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ विकसित किया जाएगा । इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले वन्यजीवों को शामिल करने की योजना है । इससे पर्यटकों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के वन्यजीव एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिलेगा ।
ज़ू का क्षेत्र उज्जैन-मक्सी फोरलेन और पंचकोशी मार्ग से दो हिस्सों में बंटता है । इसे ध्यान में रखते हुए परियोजना में 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और एक अंडरपास प्रस्तावित किया गया है । ओवरब्रिज पर पैदल चलने वालों और इलेक्ट्रिक सफारी वाहनों के लिए अलग-अलग मार्ग होंगे । साथ ही ब्रिज पर घने पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि आने वाले लोगों को लगातार जंगल जैसा अनुभव मिले और वन्यजीव भी शोर व दृश्य व्यवधान से प्रभावित न हों।
वन मंडल अधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि सिंहस्थ 2028 से पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला चरण पूरा कर आम लोगों के लिए खोल दिया जाए । इससे सिंहस्थ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उज्जैन में एक नया और आकर्षक पर्यटन स्थल भी देखने को मिलेगा।