नीमच। वर्षा ऋतु में सांप एवं अन्य विषैले जीव-जंतुओं की सक्रियता बढ़ने के साथ सर्पदंश की घटनाओं में भी इजाफा होता है। इसे देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद ने जिलेवासियों से सतर्क रहने और सर्पदंश की स्थिति में बिना किसी देरी के पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाने की अपील की है।
सीएमएचओ ने बताया कि जिले के विशेषकर जावद विकासखंड के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष सर्पदंश के अधिक मामले सामने आते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सिविल अस्पताल जावद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंगोली तथा नयागांव, अठाना, सरवानिया महाराज, लासूर, डीकेन, जाट, रतनगढ़, काकरियातलाई, अथवाकला, कदवासा और झांतला सहित सभी चिन्हित स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इन संस्थानों में सर्पदंश का उपचार 24 घंटे, सातों दिन निःशुल्क किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई होने पर खंड चिकित्सा अधिकारी डीकेन डॉ. मोहन मुजाल्दे एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद से संपर्क किया जा सकता है।
सावधानी ही बचाव-
डॉ. प्रसाद ने बरसात के मौसम में जूते, कपड़े एवं स्लीपिंग बैग उपयोग से पहले अच्छी तरह झाड़ने, झाड़ियों एवं ऊंची घास में सावधानी बरतने, रात में टॉर्च का उपयोग करने तथा मजबूत जूते एवं पूरे शरीर को ढकने वाले वस्त्र पहनने की सलाह दी। उन्होंने घर के आसपास सफाई बनाए रखने, घास की नियमित कटाई कराने, दरारों एवं बिलों को बंद रखने तथा जमीन पर सोने से बचने की भी अपील की।
झाड़-फूंक में समय न गंवाएं-
सीएमएचओ ने कहा कि सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं। पीड़ित को शांत रखें, प्रभावित अंग को स्थिर रखें और तत्काल अस्पताल पहुंचाएं। घाव को काटने, मुंह से विष चूसने, बर्फ लगाने या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने से बचें। झाड़-फूंक या तांत्रिक उपचार के चक्कर में समय न गंवाएं। आवश्यकता पड़ने पर 108 संजीवनी एम्बुलेंस की सहायता लें।
उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने से सर्पदंश से होने वाली गंभीर जटिलताओं एवं मृत्यु के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और तत्काल चिकित्सकीय उपचार कराएं।