भोपाल। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर में संस्कृत रंगमंच को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 7 से 27 जुलाई तक 21 दिवसीय संस्कृत रूपक-निर्देशन राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। नाट्यशास्त्र अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ 7 जुलाई को सुबह 10ः30 बजे परिसर के भवभूति सभागार में होगा।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात संस्कृतविद् एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी होंगे। सारस्वत अतिथि के रूप में संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्देशक गिरिशन वी. सोपानम् तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अभिनेत्री रीता वर्मा मौजूद रहेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोपाल परिसर के निदेशक प्रो. हंसधर झा करेंगे, जबकि भारतीय भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संकायाध्यक्ष प्रो. सनन्दन कुमार त्रिपाठी विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
राष्ट्रीय स्तर की इस कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के लगभग 12 राज्यों से चयनित प्रतिभागी संस्कृत नाट्य-निर्देशन का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। कार्यशाला में अभिनय, मंच-संयोजन, चरित्र-प्रस्तुति, प्रकाश व्यवस्था तथा नाट्यशास्त्र के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों में मुंबई के संजीव परमार, जयपुर के प्रो. रामकुमार शर्मा, दीपक भारद्वाज, श्रृंगेरी के डॉ. राघवेंद्र भट्ट, उमेश तरकसवार और अल्पना वाजपेयी सहित देश के प्रतिष्ठित रंगकर्मी एवं विद्वान शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार कार्यशाला का उद्देश्य संस्कृत रंगपरंपरा को समकालीन रंगभाषा और प्रयोगधर्मिता से जोड़ते हुए नई पीढ़ी के रंगकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, ताकि संस्कृत नाट्य परंपरा को आधुनिक मंचीय स्वरूप के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यशाला के समन्वयक प्रो. कृपाशंकर शर्मा एवं सह-समन्वयक डॉ. संगीता गुंदेचा हैं। भोपाल परिसर के निदेशक प्रो. हंसधर झा ने शहर के रंगकर्मियों, साहित्यकारों, कलाकारों, संस्कृत अध्येताओं एवं विद्यार्थियों से उद्घाटन समारोह में सहभागी बनने की अपील की है।
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने इस राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन के लिए भोपाल परिसर को शुभकामनाएं देते हुए इसे संस्कृत रंगमंच के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।