मल्हारगढ़। खरीफ सीजन के बीच मंदसौर जिले में किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। सहकारी समितियों में खाद की कमी, पोर्टल की तकनीकी खामियां और गिरदावरी में त्रुटियों के कारण किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। इससे खेती और उत्पादन पर संकट गहराने लगा है।
मल्हारगढ़ के किसान शिवप्रकाश मांदलिया ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि पर मक्का फसल का पंजीयन कराया था, लेकिन सहकारी समिति में खाद लेने पहुंचे तो राजस्व रिकॉर्ड में सोयाबीन दर्ज होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया गया। किसान का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड की गलती का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने आरोप लगाया कि किसान खेतों की बजाय समितियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। घंटों लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिल रही, जिससे फसल और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से गिरदावरी और पोर्टल की तकनीकी त्रुटियां तत्काल सुधारने, पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने तथा किसानों को अनावश्यक परेशान न करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
जोकचंद ने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ने की अपील भी की।