उज्जैन। गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब उज्जैन में भी राजनीतिक रंग ले चुका है। गुरुवार को उज्जैन जिला कांग्रेस ने रेलवे स्टेशन स्थित आबकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अधिकारियों से लगभग एक घंटे तक मामले को लेकर सवाल-जवाब किए।
धरने को संबोधित करते हुए विधायक महेश परमार ने गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का जिक्र किया। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि गुजरात में जब्त की गई शराब की 28 पेटियों पर उज्जैन आबकारी विभाग की सील मिली है। परमार ने सवाल उठाया कि उज्जैन आबकारी विभाग की सील और मोहर गुजरात तक कैसे पहुंची।
विधायक ने सीएम से की जांच की मांग
विधायक परमार ने कहा कि उज्जैन की पहचान भगवान महाकाल, मां शिप्रा और धार्मिक परंपराओं से है। ऐसे में जहरीली शराब मामले में उज्जैन का नाम आना गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर तत्काल स्पष्टीकरण देने और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि उज्जैन में पहले भी जहरीली शराब से मौतें हो चुकी हैं। उन्होंने नकली पनीर, नकली दवाइयों, दूषित पानी और नकली घी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए प्रदेश सरकार पर मिलावटखोरों और शराब माफिया पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
विभाग बोला- मामले का उज्जैन से संबंध नहीं
कांग्रेस के आरोपों पर आबकारी विभाग की ओर से सहायक जिला आबकारी अधिकारी मनीष बर्वे ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि गुजरात के एसपी मयूर चावड़ा के बयान के अनुसार, संबंधित शराब भावनगर में बनी और वहीं से बेची गई थी। प्रारंभिक जानकारी में इसका उज्जैन से कोई संबंध सामने नहीं आया है।
आबकारी अधिकारी ने यह भी कहा कि शराब की बोतल पर लगी सील और होलोग्राम की जांच आवश्यक है। सील की सत्यता और उसके स्रोत की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वह वास्तव में उज्जैन आबकारी विभाग से संबंधित है या नहीं।