रतलाम। पिपलौदा तहसील के आंबा, उमेदपुरा, गुडरखेड़ा, नान्दलेटा और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने गुरुवार दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मूलभूत समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर मौन धरना दिया।
धरने की सूचना पर अपर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की बात सुनी। अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर से ही चर्चा की जा सकती है। कुछ देर बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया भी वहां पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से ज्ञापन लिया और 5 लोगों को चौंबर में बुलाया। इसी दौरान भीड़ में से एक व्यक्ति द्वारा ष्बात यहीं सबके सामने होष् कहने पर कलेक्टर नाराज होकर चले गए। बाद में जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ सहित 5-6 ग्रामीण कलेक्टर से उनके चौंबर में मिले।
ये हैं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं। क्षेत्र में 24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल योजना, बेहतर सड़कें और पुराने रास्तों पर मुर्रम डलवाने की मांग की गई।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के समय सड़कों पर कीचड़ हो जाने से आवागमन ठप हो जाता है और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सबलगढ़, कोटड़ा, गुडरखेड़ा, नवाबगंज, लालपुरा, खेड़ावदा, भैसाडाबर से नांदलेटा नई आबादी, चांचरी से आंबा, भूरीघाटी, कुण्डला, बखतपुरा माताजी, गढ़ीनाल, देवगढ़ से उंचाहेड़ा सहित कई गांवों के रास्ते जर्जर हैं। कोटड़ा के पास देवझर धार्मिक स्थल तक जाने वाली सड़क भी खराब है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने स्कूल भवनों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और लालपुरा में बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाया। क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और आवश्यक सुविधाओं के अभाव की शिकायत भी की गई।
8 दिन में निराकरण का भरोसा
कलेक्टर ने समस्याओं के समाधान के लिए जिला पंचायत सीईओ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने 8 दिन के भीतर ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांतिपूर्वक वहां से रवाना हो गए।