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August 21, 2026, 7:52 pm
KHABAR : उज्जैन में 2 हजार के डिवाइस से 9 चोर गिरफ्तार, चोरी से परेशान होकर बनाया था अलर्ट सिस्टम, फंड न मिलने पर बंद की रिसर्च, पढे़ खबर

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उज्जैन। देवास रोड स्थित सांची पार्लर संचालक विशाल सिंह जादौन ने चोरी की घटनाओं से परेशान होकर एक अलर्ट सिस्टम तैयार किया। वर्ष 2012 में करीब 2 हजार रुपए की लागत से बने इस टावर बेस्ड डिवाइस की मदद से वे अब तक 9 बार चोरों को पकड़ने में पुलिस की मदद कर चुके हैं।


चूहे को पकड़ने से आया विचार
ऋषि नगर निवासी विशाल जादौन ने 14 दिसंबर 2003 को सांची पार्लर शुरू किया था। आसपास झाड़ियां और दुकान का स्ट्रक्चर कमजोर होने के कारण यहां आए दिन चोरी होती थी। एक दिन उन्होंने दुकान में चूहा पकड़ लिया। इसके बाद उनके मन में विचार आया कि जब डिवाइस से चूहे को पकड़ा जा सकता है, तो ऐसी तकनीक क्यों नहीं बनाई जा सकती, जिससे चोर के दुकान में घुसते ही जानकारी मिल जाए। करीब 6 से 8 महीने के प्रयोग के बाद उन्होंने सिस्टम तैयार किया।


मोबाइल पर आता है अलर्ट
यह टावर बेस्ड सिस्टम है, जिसमें दुकान के अलग-अलग हिस्सों को एक्टिवेट किया जा सकता है। संदिग्ध गतिविधि होते ही सिस्टम मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भेजता है और ळैड के जरिए कॉल भी आती है। इसके बाद विशाल संबंधित थाना और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देते हैं। हाल ही में रात करीब 1रू15 बजे अलार्म एक्टिव हुआ। पुलिस के साथ मौके पर पहुंचने के बाद माधवनगर थाना क्षेत्र के पुलिसकर्मी ने दुकान के अंदर मौजूद एक आरोपी को पकड़ लिया।


हमले के बाद पुलिस की मदद लेने लगे
विशाल ने बताया कि शुरुआत में वे खुद चोरों का पीछा कर उन्हें पकड़ने की कोशिश करते थे। एक बार कंजर गिरोह के सदस्य ने उनकी उंगली काट दी थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस की मदद से चोरों को पकड़ना शुरू किया। उन्होंने बताया कि पुलिस और कंट्रोल रूम ने कई बार सूचना मिलने पर तुरंत रिस्पांस दिया। विशाल ने पुलिस प्रशासन के सहयोग की तारीफ भी की।


स्वच्छ भारत और बाढ़ के लिए भी डिवाइस
विशाल का प्रयोग सिर्फ चोरी रोकने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान और बाढ़ से जुड़ी समस्याओं के लिए भी दो अन्य डिवाइस तैयार की थीं। स्वच्छ भारत से जुड़ी उनकी एक डिवाइस नगर निगम प्रशासन तक भी पहुंची थी। हालांकि बाद में उसका क्या उपयोग हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिली।


पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए
विशाल ने इलेक्ट्रिकल से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की है। वे जावरा के 1997 बैच के विद्यार्थी रहे और 4 सेमेस्टर तक पढ़ाई की, लेकिन फाइनल ईयर पूरा नहीं कर सके। नौकरी के अवसर होने के बावजूद उज्जैन में रहना जरूरी था। इसके चलते उन्होंने सांची पार्लर के जरिए अपना रोजगार शुरू किया।


सीमा सुरक्षा के लिए दिया डेमो
वर्ष 2013 से 2017 के बीच विशाल ने अपने प्रयोग को देश की सीमा सुरक्षा में इस्तेमाल करने की संभावना को लेकर कई सरकारी संस्थानों में डेमो दिया। वे दिल्ली और भोपाल गए और प्रधानमंत्री कार्यालय, विज्ञान मंत्रालय, गृह मंत्रालय, पुलिस मॉडर्नाइजेशन विभाग और ठैथ् तक अपना डिवाइस लेकर पहुंचे। उनका उद्देश्य था कि दुकान में घुसने वाले व्यक्ति की गतिविधि का अलर्ट देने वाली इस तकनीक का इस्तेमाल सीमा क्षेत्र में निगरानी या चेक-पोस्ट जैसी जगहों पर किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि भारत की सीमा सुरक्षा मुख्य रूप से सैटेलाइट आधारित है। पहाड़, बर्फ, दलदल और समुद्री क्षेत्र जैसी अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मौजूदा टावर बेस्ड सिस्टम को सीधे लागू करना मुश्किल है। उन्हें तकनीक में और सुधार करने की सलाह दी गई।


मदद नहीं मिली तो रिसर्च बंद
विशाल के मुताबिक, वर्ष 2013 से 2017 तक वे सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे। अधिकारियों से प्रशंसा मिली, लेकिन आर्थिक या तकनीकी सहयोग नहीं मिला। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बार-बार दुकान बंद करके रिसर्च के लिए जाना भी मुश्किल होता गया। वर्ष 2017 के बाद उन्होंने अपने सभी रिसर्च प्रोजेक्ट बंद कर दिए और उपकरणों को डिब्बों में रख दिया।


विशाल का कहना है कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ कमाना नहीं रहा। अगर सरकार की ओर से आर्थिक और तकनीकी मदद मिले, तो एक छोटी सी गुमटी से शुरू हुई यह सोच देश के काम आ सकती है।


 

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