मंदसौर। जिले में 26 अगस्त की शाम से बारिश का दौर थमा हुआ है। पिछले चार दिनों से बारिश नहीं होने के कारण तेज धूप और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं खेतों में ऊपरी सतह की नमी कम होने से किसान खरीफ फसलों को लेकर चिंतित हैं। मौसम विभाग के अनुसार 1 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है, जबकि 2-3 सितंबर से जिले में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
27, 28 और 29 अगस्त को जिले में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं हुई। रविवार को भी मौसम साफ रहा और दिनभर धूप के साथ उमस बनी रही। 31 अगस्त को बादलों की आवाजाही के बीच अधिकतम तापमान करीब 29 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 1 सितंबर को भी बादल और धूप का मिला-जुला असर रहने की संभावना है।
2 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मौसम-
मौसम विभाग के अनुसार 2 सितंबर से मौसम में बदलाव के आसार हैं। जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। 3 सितंबर को बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी तथा 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। 5 सितंबर को भी मौसम सक्रिय रहने के संकेत हैं।
पिछले साल की तुलना में 87.3 मिमी कम बारिश-
इस मानसून सीजन में जिले में अब तक 588.0 मिमी (23.15 इंच) बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 1 जून से 30 अगस्त तक 675.3 मिमी (26.59 इंच) बारिश हुई थी। इस तरह इस वर्ष समान अवधि की तुलना में 87.3 मिमी (3.44 इंच) कम बारिश दर्ज हुई है।
बारिश के ब्रेक से खेतों में घटने लगी नमी-
लगातार बारिश नहीं होने और तेज धूप के कारण खेतों की ऊपरी सतह की नमी कम होने लगी है। इसका असर उन खेतों में अधिक हो सकता है, जहां पहले से मिट्टी में नमी कम है। सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों में लगातार गर्मी और नमी की कमी रहने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। फूल और फलियां बनने की अवस्था में पानी की कमी से उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
बारिश के बाद बढ़ी गर्मी और उमस के बीच फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना भी रहती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल तीन-चार दिन के बारिश ब्रेक से बड़े नुकसान की स्थिति नहीं है, लेकिन बारिश का अंतराल बढ़ने पर खेतों में नमी फसलों के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगी।
मौसम बदलाव से ओपीडी में मरीज बढ़े-
मौसम में बदलाव का असर जिला अस्पताल की ओपीडी में भी दिखाई दे रहा है। इन दिनों प्रतिदिन करीब 1000 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। तेज धूप और उमस के बीच अचानक बादल या बारिश होने से तापमान में बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल फीवर और गले के संक्रमण के मरीज सामने आ रहे हैं। दस्त और पेट दर्द की शिकायत वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आकाश चौधरी के अनुसार मौसम परिवर्तन के साथ संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को मच्छरों से बचाव करने, पानी उबालकर पीने और ताजा भोजन करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि दो-तीन दिन तक बुखार बना रहता है तो बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।