नीमच। कंजार्डा निवासी हिरालाल पिता घीसालाल मालवीय द्वारा भूमि विवाद को लेकर प्रशासन पर लगाए गए उपेक्षा के आरोपों पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मनासा ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रशासन के अनुसार संबंधित भूमि का पूर्व में सात बार सीमांकन कराया जा चुका है। साथ ही, मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में न्यायालय के आदेशों के विपरीत राजस्व स्तर से किसी प्रकार की राहत देना नियमानुसार संभव नहीं है।
7 बार हो चुका है भूमि का सीमांकन-
एसडीएम मनासा के अनुसार ग्राम कंजार्डा स्थित सर्वे क्रमांक 702 की भूमि का पूर्व में सात बार सीमांकन किया जा चुका है। सीमांकन के अनुसार शिकायतकर्ता की भूमि मुख्य सड़क से पीछे स्थित है। प्रशासन का कहना है कि शिकायतकर्ता मुख्य सड़क पर स्थित दिलीप मेहता की भूमि को अपनी भूमि बता रहे हैं।
सिविल न्यायालय के आदेश का हवाला
प्रशासन के अनुसार इसी भूमि विवाद से संबंधित RCA क्रमांक 31/2023 में प्रथम जिला न्यायाधीश, मनासा के न्यायालय ने 15 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर शिकायतकर्ता की अपील निरस्त कर 31 अक्टूबर 2023 के निर्णय एवं डिक्री की पुष्टि की थी। साथ ही भूमि में हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।
मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन-
प्रशासन ने बताया कि इसी विवाद को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2, मनासा के समक्ष RCA/34/2026, हिरालाल विरुद्ध दिलीप मेहता प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। यह प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
दस्तावेजों के साथ जांच के लिए बुलाया था-
एसडीएम कार्यालय के अनुसार शिकायत की पुनः जांच के लिए हिरालाल को 8 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे समस्त दस्तावेजों के साथ एसडीएम कार्यालय मनासा में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं नोटिंग भी की गई थी।
निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं पहुंचे
प्रशासन के अनुसार निर्धारित समय पर एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के बजाय शिकायतकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और आत्मदाह का प्रयास किया। प्रशासन ने इसे अपनी शिकायत पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने का प्रयास बताया है।
दूसरे पक्ष ने भी पुलिस में दी शिकायत-
प्रशासन के अनुसार दिलीप कुमार पिता छोगमल मेहता ने 22 जुलाई 2026 को हिरालाल एवं अन्य के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी मनासा तथा चौकी प्रभारी को शिकायत दी थी। इस शिकायत पर कार्रवाई प्रचलित बताई गई है।
प्रशासन ने आरोपों को बताया तथ्यहीन-
एसडीएम कार्यालय के अनुसार भूमि का सात बार सीमांकन, न्यायालयीन प्रक्रिया तथा पुनः जांच के लिए अवसर दिए जाने से स्पष्ट है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई है। प्रशासन का कहना है कि सिविल न्यायालय में विचाराधीन विवाद में न्यायालय के आदेशों के विपरीत राजस्व स्तर से मनमाफिक राहत देना संभव नहीं है।
प्रशासन ने उपलब्ध अभिलेखों, सीमांकन रिपोर्ट और न्यायालयीन आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक उपेक्षा के आरोप निराधार एवं तथ्यहीन हैं। उसके अनुसार शिकायतकर्ता की भूमि मुख्य सड़क से पीछे स्थित है और मुख्य सड़क की भूमि पर कब्जा दिलाना नियमानुसार संभव नहीं है।