उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा के विस्थापन को लेकर विरोध तेज हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की कवायद के बीच मंदिर परिसर में साधु-संतों, हिंदूवादी संगठनों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। मामले को लेकर शहर में भी चर्चाओं का दौर जारी है।
विरोध कर रहे साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि प्रशासन, नगर निगम और पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रतिमा को विस्थापित करने के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनका कहना है कि प्रतिमा को किसी भी स्थिति में हटाने नहीं दिया जाएगा।
मंगलवार सुबह से मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन के साथ भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि महाराज भी मंदिर पहुंचे और प्रतिमा विस्थापन का विरोध जताया। उनके साथ हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर, शैलू यादव, संतोष व्यास, मनीष सिंह चौहान और शिवेंद्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
प्रतिमा विस्थापन की जानकारी सामने आने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। उज्जैन के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने मंदिर से जुड़ी अपनी आस्था और अनुभव साझा करते हुए प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की।
हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने कहा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है और किसी भी परिस्थिति में प्रतिमा का विस्थापन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं, नगर निगम उपायुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि प्रतिमा विस्थापन की कार्रवाई पुजारी की सहमति और उनके मार्गदर्शन में की जा रही है। उन्होंने कहा कि मंदिर हटाने के दौरान गुंबद और दीवार को हटाया गया था। इसके बाद प्रतिमा का तकनीकी परीक्षण कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है।
उपायुक्त के अनुसार, तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय से पहले संबंधित लोगों की आपसी सहमति ली जाएगी। प्रशासन द्वारा मार्ग के विकास कार्य में सभी का सहयोग लेने की बात भी कही गई है।
फिलहाल मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा की सुरक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं।