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September 9, 2026, 10:37 am
NEWS : शिक्षा के लिए दान देने वाले भामाशाहों का जिला कलक्टर ने किया सम्मान, 80 वर्षीय मांगी बाई ने स्कूल को माना मंदिर, बच्चों को भगवान, निरक्षर होने के बावजूद शिक्षा के लिए दिए 15 लाख, पढ़े रेखा खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। उम्र 80 वर्ष, जीवन में कोई बेटा-बेटी नहीं और स्वयं निरक्षर... इसके बावजूद गांव के बच्चों का भविष्य शिक्षा से रोशन हो, इस भावना ने राशमी तहसील के देवीपुरा गांव की मांगी बाई अहीर को ऐसा संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया, जो समाज के लिए अनुकरणीय बन गया है। मांगी बाई ने विद्यालय को मंदिर और बच्चों को भगवान मानते हुए विद्यालय विकास के लिए 15 लाख रुपए का सहयोग दिया है।

विधवा मांगी बाई वर्तमान में अपने भतीजे देवीलाल अहीर के साथ रहती हैं। पहले धार्मिक कार्यों में दान करने वाली मांगी बाई ने अब शिक्षा को ही सबसे बड़ी सेवा मान लिया है। उन्होंने विद्यालय में पानी की टंकी, एक कक्षाकक्ष और सरस्वती मंदिर के निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए सहयोग दिया।

मांगी बाई का कहना है कि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ें, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं हो सकती। उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

हर माह 8 भामाशाहों के सम्मान की पहल-
जिला कलक्टर की पहल पर शिक्षा विभाग में विद्यालयों के विकास के लिए सहयोग करने वाले भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर माह आठ भामाशाहों का सम्मान किया जाएगा। इसी क्रम में मंगलवार को समिति कक्ष में जिला कलक्टर ने शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग करने वाले भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

‘शिक्षा के मंदिरों को समृद्ध करना ही सच्ची सेवा’
जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को समृद्ध करना ही सच्ची सेवा है। विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करने वाले भामाशाहों का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि समाज से बहुत कुछ मिला है और अब समाज को कुछ लौटाने की भावना भी होनी चाहिए। उन्होंने मांगी बाई के समर्पण को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।

डॉ. मुस्तफा ने गांव में शुरू की डिजिटल शिक्षा की पहल-
भादसोड़ा के मूल निवासी और अमेरिका में रह रहे एनआरआई डॉ. मुस्तफा ने गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए करीब 18 लाख रुपए का सहयोग किया। उनके सहयोग से विद्यालय में कंप्यूटर लैब, शिक्षकों की व्यवस्था, इन्वर्टर, सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

डॉ. मुस्तफा ने विद्या क्रांति फाउंडेशन की स्थापना भी की है, जो क्षेत्र के विद्यालयों के विकास के लिए कार्य करेगा।

150 परिवारों ने मिलकर बदली स्कूल की तस्वीर-
वहीं राउप्रावि मडावदा की स्कूल प्रबंधन समिति ने करीब 150 घरों वाले गांव के प्रत्येक परिवार को विद्यालय से जोड़ा। ग्रामीणों ने मिलकर करीब 5 लाख रुपए जुटाकर विद्यालय का विकास कराया। आज यह विद्यालय निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है। ग्रामीणों की मांग पर जिला कलक्टर ने खेल मैदान के लिए भूमि प्रबंधन, बालिका शौचालय और स्मार्ट बोर्ड के प्रस्ताव सीएसआर के माध्यम से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए।

इन भामाशाहों का भी हुआ सम्मान-
कार्यक्रम में मोरवन के प्रकाश टेलर ने 1.50 लाख रुपए, डूंगला के सेवानिवृत्त व्याख्याता नरेश कुमार मालू ने 1.11 लाख रुपए, जाशमा के सम्पतलाल बोरदिया ने 1 लाख रुपए तथा सेवानिवृत्त अध्यापिका तुलसी जोशी और सुदरी के प्रहलाद जाट ने 51-51 हजार रुपए विद्यालय विकास के लिए दिए। सभी का भामाशाह के रूप में सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस रविन्द्र मेघवाल, मुद्रा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, डाइट प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार शर्मा, समसा के एडी नरेन्द्र सिंह चौहान, एसीपी दीनदयाल नारायणीवाल, पीओ शिवकुमार चावला, विनोद कुमार मुंदड़ा, संदर्भ व्यक्ति चित्तौड़गढ़ ब्लॉक डॉ. विकास अग्रवाल, हेमेन्द्र सोनी सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य मौजूद रहे।

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