रतलाम। सोयाबीन फसल में हुए नुकसान के बावजूद अपेक्षित बीमा राशि नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जावरा को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने फसल नुकसान के आकलन के लिए किए जा रहे सैटेलाइट सर्वे का विरोध करते हुए क्रॉप कटिंग के माध्यम से वास्तविक नुकसान का आकलन करने की मांग की।
किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष बेमौसम बारिश और कीट प्रकोप के कारण सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ था। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से तहसील स्तर पर 209 करोड़ रुपये की राहत राशि दिए जाने पर किसानों ने सरकार का आभार जताया, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम जमा करने के बावजूद अपेक्षित बीमा राशि नहीं मिलने पर सवाल उठाए।
बीमा राशि को लेकर जताई नाराजगी
भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि कई किसानों को बीमा के नाम पर महज 100 से 200 रुपये जैसी राशि मिली है। किसानों का कहना है कि जब फसल में हजारों रुपये की लागत लगी है तो इतनी कम राशि से नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। संघ ने बीमा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसानों को वास्तविक नुकसान के अनुसार बीमा राशि दिलाने की मांग की।
सैटेलाइट सर्वे का विरोध
किसानों ने फसल नुकसान के लिए सैटेलाइट सर्वे की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि खेत में वास्तविक स्थिति जाने बिना केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर नुकसान का आकलन करना उचित नहीं है। किसानों ने अधिकारियों से खेतों का मौके पर निरीक्षण कर क्रॉप कटिंग के आधार पर नुकसान का आकलन करने की मांग की है।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
भारतीय किसान संघ ने ज्ञापन के माध्यम से सात प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखीं। इनमें सैटेलाइट सर्वे बंद कर क्रॉप कटिंग से नुकसान का आकलन करना, प्रत्येक तहसील में बीमा कंपनी का कार्यालय खोलना, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की लंबित राशि तत्काल शुरू करना तथा राजस्व रिकॉर्ड की त्रुटियों को सुधारना शामिल है।
इसके अलावा गांवों में जर्जर बिजली केबलों को बदलने और ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की समस्या दूर करने की मांग भी की गई। किसानों का कहना है कि बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण सिंचाई में परेशानी हो रही है और कई जगह जर्जर केबल हादसों का कारण बन सकती हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जावरा तहसील के किसान बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। संघ का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान किया जाना जरूरी है, अन्यथा आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित बीमा कंपनी की होगी।