प्रतापगढ़। नई अफीम नीति 2026-27 घोषित होने से पहले किसान हितों से जुड़े प्रावधान शामिल कराने के लिए भारतीय किसान संघ के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल ने अफीम किसानों की समस्याओं और मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपा। किसान संघ के अनुसार, वार्ता सकारात्मक रही और अधिकांश मांगों को किसान हितैषी नई नीति में शामिल करने पर सहमति बनी।
वार्ता में भारतीय किसान संघ के प्रदेश अफीम आयाम प्रमुख बद्रीलाल जाट, प्रदेश राजस्व प्रमुख शिवराज पुरी, प्रांत जैविक प्रमुख गोपाल लाल खटवड़, किसान गीतालाल धाकड़ एवं किसान सोहनलाल आंजना शामिल रहे। सोहनलाल आंजना ने बताया कि संघ पिछले वर्षों में भी अफीम किसानों की समस्याओं को लेकर वित्तमंत्री से वार्ता करता रहा है। किसानों को इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसी क्रम में नई नीति जारी होने से पहले जरूरी प्रावधान शामिल कराने के उद्देश्य से यह वार्ता की गई।
मुलाकात से पहले प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय पर बैठक की। इसमें मंत्रालय के साथ हुई पूर्व वार्ताओं की समीक्षा करने के साथ किसानों की समस्याओं और नई नीति के प्रमुख मुद्दों पर मंथन किया गया तथा समाधान के सुझाव तैयार किए गए।
प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री के समक्ष 1990 से अब तक विभाग या किसानों के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कटे हुए सभी पट्टे पुनः जारी करने, अफीम का न्यूनतम मूल्य 10 हजार रुपए प्रति किलो करने, मार्फिन की अनिवार्यता समाप्त करने और वजन आधारित औसत को आधार बनाने की मांग रखी। साथ ही 3.0 मार्फिन होने पर पट्टा जारी रखने का सुझाव दिया।
इसके अलावा एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/18 में संशोधन, धारा 8/29 समाप्त करने, सभी किसानों को समान आरी के पट्टे देने, पूर्व की तरह दो प्लॉट में पट्टा बोने की अनुमति तथा सीपीएस वाले किसानों को भी लुवाई-चिराई के पट्टे देने की मांग रखी गई। किसान संघ ने कच्चा तौल पूरी तरह बंद करने और अफीम नीति हर वर्ष के बजाय पांच वर्ष के लिए बनाने की मांग भी उठाई।
प्रतिनिधिमंडल ने डोडाचूरा को एनडीपीएस के दायरे से हटाकर आबकारी विभाग के अधीन करने, पट्टाधारी किसान के वृद्ध या बीमार होने की स्थिति में नामांतरण की प्रक्रिया फिर शुरू करने तथा विशेष परिस्थितियों में किसान के जीवित रहते पट्टा उत्तराधिकारी के नाम करने की प्रक्रिया बहाल करने की मांग भी रखी।
घातक नशीले पदार्थों पर सख्ती की मांग-
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अफीम और डोडाचूरा का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक औषधियों से जुड़ा रहा है। किसान संघ ने एमडी, कोकीन, हेरोइन और ब्राउन शुगर जैसे रासायनिक रूप से तैयार घातक नशीले पदार्थों के खिलाफ और कठोर कानून बनाने की मांग की। साथ ही डोडाचूरा को पहले की तरह आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग की अनुमति देने का सुझाव भी दिया।