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September 11, 2026, 5:36 pm
KHABAR : सरकार की परमिशन के बगैर अफसरों पर केस नहीं, आधिकारिक काम के मामलों में हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीएचक्यू का निर्णय, लोकायुक्त के 295 केस पेंडिंग, पढे़ खबर

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प्रदेश में अब अफसरों, खासकर राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ सरकारी कामकाज से जुड़े आधिकारिक मामलों में सरकार की अनुमति के बगैर आपराधिक केस दर्ज नहीं होंगे। अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यदि किसी सरकारी अधिकारी पर उसके आधिकारिक काम के दौरान किए गए कार्य को लेकर शिकायत होती है, तो ऐसे मामले में अदालत की ओर से संज्ञान लेने से पहले राज्य शासन से अभियोजन स्वीकृति लेना जरूरी होगा। दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभियोजन स्वीकृति देने की स्थिति देखें तो पता चलता है कि अकेले लोकायुक्त के 295 मामलों में सरकार ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है।


पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसमें हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के 19 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला दिया गया है। दरअसल, हाईकोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ बिना आवश्यक अभियोजन स्वीकृति के दर्ज शिकायत पर अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश की पुलिस इकाइयों को इस आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।


किन मामलों में जरूरी होगी मंजूरी
यदि कोई राजपत्रित सरकारी अधिकारी अपने सरकारी पद की जिम्मेदारी निभाते समय कोई ऐसा काम करता है, जिसे लेकर उसके खिलाफ आपराधिक शिकायत की जाती है और वह मामला उसके आधिकारिक कामकाज से जुड़ा है, तो अदालत में आगे की कार्रवाई से पहले शासन की अनुमति जरूरी हो सकती है। इस संबंध में पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 में प्रावधान था, जो अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 218 में किया गया है।


आम लोगों पर क्या असर होगा
विभागीय अफसरों के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत नहीं की जा सकती। सामान्य मामलों में शिकायत की जा सकती है, लेकिन यदि आरोप अधिकारी के सरकारी कर्तव्य निभाने से सीधे जुड़े हैं, तो मामले में अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले कानून के तहत शासन से अभियोजन स्वीकृति लेनी होगी। यह प्रावधान मुख्य रूप से उन मामलों से जुड़ा है, जिनका संबंध अधिकारी के आधिकारिक कामकाज से है।


सभी पुलिस इकाइयों को जानकारी देने के निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित पुलिस इकाइयों को हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने और जरूरत पड़ने पर उसमें बताए गए न्यायिक फैसलों का उपयोग करने को कहा है। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सरकारी अधिकारियों के आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामलों में अभियोजन स्वीकृति के प्रावधानों की व्याख्या की गई है।


लोकायुक्त को 295 मामलों में नहीं मिली है अभियोजन स्वीकृति
दूसरी ओर, सरकार द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध केस चलाने की अभियोजन स्वीकृति देने के मामले की बात करें तो पता चलता है कि अकेले लोकायुक्त पुलिस के पास 295 मामले इसलिए पेंडिंग हैं, क्योंकि सरकार इन मामलों में अभियोजन की स्वीकृति नहीं दे रही है। इसमें IAS, IPS और राज्य के राजपत्रित कैडर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। विभागवार अभियोजन के लिए पेंडिंग केस की जानकारी के अनुसार, अभियोजन स्वीकृति की शासन स्तर पर पेंडेंसी इस तरह है।

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