BREAKING NEWS
NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     BIG NEWS : त्योहारों में मिठाई खरीदने से पहले हो.. <<     NEWS : पंचायत समिति सदस्य चुनाव, जिले की छह.. <<     BIG REPORT : पुलिस चौकी के सामने चेकिंग में व्यस्त.. <<     KHABAR : स्वास्थ्य विभाग के कामकाज का होगा पूरा.. <<     BIG NEWS : शतरंज की चालों से निखर रही विद्यार्थियों.. <<     KHABAR : मनासा में ट्रैक्टर ने कार को मारी जोरदार.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG NEWS : नीमच के व्यस्त चौराहे पर थम गई रफ्तार,.. <<     KHABAR : बुन्देली गायक सुनील लोधी की आंखों का इलाज.. <<     REPORT : गरोठ में मिलावट के शक पर प्रशासन का बड़ा.. <<     BIG REPORT : अवैध मदिरा कारोबार के खिलाफ आबकारी.. <<     KHABAR : सांदीपनि विद्यालय जावद में कलेक्टर.. <<     KHABAR : दोहरे हत्याकांड में खाकी की थ्योरी.. <<     BIG NEWS : मध्यप्रदेश कांग्रेस सेवादल की नई.. <<     KHABAR : बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक टीम.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
September 11, 2026, 6:13 pm
KHABAR : मां की ममता की जीत, बेटे की पढ़ाई के लिए बनी थी बैसाखी, अब प्रशासन ने दिया ई-रिक्शा, पढे़ दिपक कुमार गर्ग की खबर 

Share On:-

शहडोल। मां की पीठ पर बैठकर स्कूल जाने वाला दिव्यांग बेटा और बेटे को पढ़ाने के लिए उसकी मां का हर दिन बैसाखी बन जाना। शहडोल के सुदूर झिक बिजुरी क्षेत्र से सामने आई मां-बेटे के संघर्ष की यह तस्वीर जब  जिला प्रशासन तक पहुंचा अब इस परिवार के लिए राहत की खबर है। प्रशासन ने दिव्यांग छात्र राजकुमार जायसवाल को इलेक्ट्रिक रिक्शा उपलब्ध करा दिया है। साथ ही उसे केयरटेकर की सुविधा के साथ हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने की मंजूरी भी दी गई है। जैसे ही राजकुमार को ट्राईसाइकिल मिली, उसने उसे गले लगाया और चूम लिया,मानो ये सिर्फ साइकिल नहीं, बल्कि उसके सपनों को मिली नई उड़ान हो, इतना ही नहीं, अब राजकुमार के लिए केयरटेकर के साथ हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने का रास्ता भी साफ हो गया है। बस में भी उसे किराया नहीं देना पड़ेगा, यानी जिस मां की पीठ अब तक बेटे की बैसाखी थी, उसकी बेबसी आखिरकार जीत में बदल गई।


आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले  के दर्शीला गांव का 12वीं का छात्र राजकुमार, दिव्यांगता के बावजूद पढ़ाई का जुनून नहीं छोड़ा, स्कूल करीब 10 किलोमीटर दूर था, इसलिए मां रोज बेटे को अपनी पीठ पर बैठाकर बस तक ले जातीं और स्कूल पहुंचने के बाद कक्षा तक भी पहुंचाती थीं, मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद  प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई, राजकुमार को ट्राईसाइकिल मिली तो उसकी खुशी देखते ही बनी,उसने साइकिल को गले लगाया, चूमा और जैसे कह दिया,अब मैं खुद चलूंगा,अब केयरटेकर के साथ हॉस्टल में रहकर राजकुमार अपना भविष्य गढ़ेगा, मां की पीठ से शुरू हुआ सफर अब ट्राईसाइकिल के पहियों पर दौड़ेगा और यही है एक बेबस मां की असली जीत। 


वही इस मामले में शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संबंधी जानकारी मिली थी ,जिसमें एक चेक विकलांग छात्र अपनी मां की मदद से स्कूल आता जाता था, जिसको संज्ञान में लेते हुए छात्रा को ट्राई सायकिल उपलब्ध कराया है साथ ही उसे अपने अटेंडर के हॉस्टल में भी रहने की व्यवस्था करा रहे है। 

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE