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December 26, 2022, 1:27 pm
BIG NEWS : अगर सरकारी विभाग से गायब हुए दस्तावेज तो हो जाईये सावधान, एमपी में भी लागु होगा बड़ा नियम, सरकारी कागज गुमने पर जिम्मेदार को सकती ये सजा, जानिए क्या है आदेश, पढ़े खबर

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भोपाल। मध्यप्रदेश में अब यदि किसी भी सरकारी ऑफिस से कोई सरकारी कागज गायब हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी को पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993 के तहत 5 साल की जेल हो सकती है। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के आयुक्त राहुल सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग को सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश में पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993 लागू करने का निर्देश दिया है। सनद रहे कि जब से सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ है तब से सरकारी फाइलों के गायब होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। 

शासकीय कार्यालयों में लगातार गायब होते कागज और फाइलों से चिंतित मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग को मध्य प्रदेश का पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट बनवाने के लिए निर्देशित किया है। साथ में जब तक मध्यप्रदेश का पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट बनकर लागू नहीं होता है तब तक सिंह ने विभाग को केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के अनुरुप गाइडलाइंस तैयार कर फाइलों का प्रबंधन और उसके गायब होने पर दोषी कर्मचारियों या अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाई जिसमे 5 साल तक का कारावास और 10000 रूपये तक का जुर्माना शामिल है, सुनिश्चित करने को भी कहा है। 

सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा कि आयोग के लिए चिंता का विषय है कि मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यालयों में रिकॉर्ड की देखरेख प्रबंध पद्धति में सुधार लाने सुरक्षा प्रबंधन एवं रिकॉर्ड गुम या चोरी होने, गलत तरीके से नष्ट करने पर दोषी अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य का अपना पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट ही नहीं है। 

सिंह ने अपने आदेश में कहा कि कागजों के गायब होने पर अधिकारियों के उदासीन बस रवैए के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक मुकम्मल विधिक व्यवस्था पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट जो केंद्र एवं अन्य राज्यों में उपलब्ध है पर मध्यप्रदेश में उपलब्ध नहीं है। सिंह ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट रिकॉर्ड गायब होने होने पर दोषी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध 5 साल तक के कारावास एवं 10000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है या दोनों से दंडनीय करने का भी प्रावधान है।

आयुक्त राहुल सिंह अपने आदेश में कहा कि राज्य सूचना आयोग में दस्तावेजों के गायब होने के कई प्रकरण सामने आते रहे और प्रशासनिक स्तर पर इसे बिल्कुल सतही स्तर पर नहीं देखा जा सकता है। इन गायब कागजों के चलते कई मामलों में तो लोगों का जीवन और कैरियर तक दांव पर लग जाते हैं। शासकीय कार्यालय में से किसी के जमीन के कागज गायब है। नियुक्ति में गड़बड़ी के कागज गायब है। जांच संबंधित दस्तावेज गायब है। भ्रष्टाचार घोटाले से संबंधित प्रकरण में दस्तावेज गायब है। किसी व्यक्ति या संस्था को प्रभावित करने वाला कोई महत्वपूर्ण आदेश गायब है, तो कहीं किसी शासकीय अधिकारी के विरूद्ध की गई कार्रवाई की कागज गायब है।

कई मामलों में जब आयोग द्वारा संबंधित लोक प्राधिकारी को मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा जाता है तो यह भी हुआ है कि आपराधिक मामला कायम होता देख यह गायब कागज वापस अवतरित हो जाते हैं। सिंह ने कहा कि गायब कागजों को लेकर अधिकारियों के उदासीन रवैया देखा गया है। ऐसा नहीं है कि गायब कागजों की आम नागरिक परेशान होते हैं। रिकॉर्ड को लेकर लापरवाही का शिकार राजकीय अधिकारियों कर्मचारी भी हो जाते हैं। शासकीय कर्मचारी अधिकारियों के विभागीय रिकॉर्ड गुम हो जाने से उनके सेवाकाल एवं सेवानिवृत्ति के समय अधिकारी कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

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