मुरैना | एक तरफ सरकार नदियों को स्वच्छ बना रही है तो वहीं मुरैना की इस नदी का हाल देखते ही नहीं बनता है यह मुरैना की छौंदा नदी है जो अब नाले में तब्दील हो चुकी है नदी इतनी गन्दी और प्रदूषित हो चुकी है कि इसमें से पशु पानी भी नहीं पी पा रहे है और ना ही मछलियां इस पानी में जीवित रह पा रही है जब नदी के पास से लोग गुजरते है तो बदबू से हाल बेहाल हो जाता है इतना ही नहीं इस नदी में को नगर निगम एक तरफ शहर को साफ करता है जब उसी के द्वारा इस नदी में कचरा फेंका गया हो तो क्या ही कहना अगर आप नदी पर जायेगे तो आप खुद देख पायेंगे कि किस प्रकार से कचरे का पहाड़ नदी में बना दिया गया है, नदी का पानी गंदा होने के कारण इसमें जलकुंभी भी भारी मात्रा में फेल चुकी है यदि इस नदी को जल्दी ही साफ नहीं कराया गया तो इस नदी की दशा और दिशा दोनो की बदल जायेगी।
क्या होती है नदी को कचरे से हानि
पर्यावरण विद डॉक्टर विनायक सिंह तोमर ने बताया कि नदियों में कचरा डालने से जल की अवशोषण क्षमता कम हों जायेगी तथा मृदा कणों के बीच का स्थान खत्म हो जाएगा जिसके कारण पोषक तत्व गहराई में चले जायेगे पारिस्थितिकी तंत्र में भौगोलिक परिवर्तन होने से जलीय जीवों की संख्या घट जाएगी, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जायेगा औधोगिक अपशिष्ट और रासायनिक पदार्थ के जल में विसर्जन से जल के भौतिक और रासायनिक गुण परिवर्तित हो जायेगे जिससे जल के पी एच मान और उसकी कठोरता में परिवर्तन हो जायेगा।
क्या है अधिकारियों का कहना
वहीं अपर कलेक्टर नरोत्तम भार्गव ने बताया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा नदी में कचरा डाला गया था लेकिन जो प्राकृतिक स्थान हैं वहां पर कचरा डंप नहीं किया जाना है यह पूर्व में ही न्यायालय और सरकार के निर्देश हैं जो कचरा डाला गया है उसका ट्रीटमेंट भी होगा और जो जलाशयो की सफाई और शुद्धीकरण के प्रयास लगातार जारी हैं।
बाइट-नरोत्तम भार्गव एडीएम मुरैना