तराना | पुण्य धाम कोटेश्वर महादेव परिसर में सावन मास के पावन अवसर पर राजावत परिवार द्वारा सप्त दिवसीय संगीत में श्री शिव महापुराण कथा के षष्टम दिवस की कथा में बिल्वपत्र के वृक्ष की महत्ता बताते हुए कहा कि जिस प्रकार एक नारी सुंदर आभूषण एवं सिंगार करके सुंदर दिखती है उसी प्रकार यह हमारी पृथ्वी सुंदर-सुंदर वृक्ष लगाकर शोभनीय लगती है। तथा मनुष्य जीवन में प्रत्येक मनुष्य पर एक वृक्ष का कर्ज होता है यह कार्य केवल मनुष्य योनि में वृक्षारोपण करके ही उतारा जा सकता है साथ ही रुद्राक्ष का महत्व बताते हुए बताया कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति गौ माता के गोबर से हुई है तथा गौमाता साक्षात सर्व कामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी है अतः हर सनातन संस्कृति प्रेमी अपने घर में 1 देसी गाय अवश्य पालना चाहिए साथ ही भस्म का महत्व बताते हुए कहा कि मुख में शिव का नाम भाल में भस्म का त्रिपुंड व गले में रुद्राक्ष की माला यह तीनों शिव त्रिवेणी के समान है जो व्यक्ति इन तीनों को मनुष्य जीवन में धारण करता है वह साक्षात रूद्र स्वरूप हो जाता है आज कथा में मालवा माटी के संत श्री अर्जुन जी गौतम ने उपस्थित होकर शिव महापुराण का पूजन अर्चन कर कोटेश्वर महादेव का दर्शन लाभ प्राप्त किया राजावत परिवार के द्वारा समस्त धर्म प्रेमी माताओं बहनों से भाइयों से अनुरोध किया गया है कि अधिक से अधिक संख्या में शिव महापुराण कथा श्रवण कर जीवन को धन्य बनावे