सरवानिया महाराज। शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने आमजनों की उस धारणा को झुठला दिया है जिसमें अक्सर लापरवाही के आरोप प्रत्यारोप लगते रहते है। इस बार बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं स्वच्छता तथा संक्रमण मुक्त वातावरण में तय सात मानकों पर खरा उतरने के कारण सरकार ने कायाकल्प अवार्ड से सम्मानित किया है। इसके तहत सरवानिया महाराज के सरकारी अस्पताल को पचास हजार रुपये इनाम स्वरूप प्रदान किए गये है।
पहली बार शहर के लेवल टू के इस सरकारी अस्पताल को सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 15 मई 2015 में स्थापित सार्वजनिक सेवाओं और सुविधाओं के साथ साथ सफाई तथा अस्पताल के अभिलेखों के रख रखाव एवं बेहतर प्रबंधन के लिए यह सम्मान मिला है।
परिसर छोटा बजट कम, समुचित प्रयास पर बधाई-
पीएचसी सरवानिया महाराज के मेडिकल आफिसर डॉ संदीप शर्मा ने बताया की राज्य सरकार के द्वारा तय विशेष टीम पीएचसी पर उपलब्ध सुविधाओं के साथ साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, अभिलेख का अवलोकन करती है जिसमे हमारे अस्पताल का चयन कायाकल्प अवार्ड के लिए किया है। इसके लिए सभी शहरवासियों को बधाई शुभकामनाएं। यद्यपि हमारे पास परिसर छोटा है बजट का अभाव है फिर भी हमने अच्छा करने की कौशिश की है। एक विकलांग शोचालय की कमी के कारण हमारे दस नबंर कट गये है। फिर भी सभी के समुचित प्रयासों से हमें यह अवार्ड मिला है।अस्पताल के सभी कर्मचारी आम जन भी इसके लिए बधाई के पात्र है। योजना मे मिलने वाली रुपये पचास हजार की राशि का 75 फिसदी हिस्सा स्वास्थ्य साफ सफाई, इंफ्रास्ट्रक्चर क्लोजर सुद्ढ़ीकरण रख रखाव पर खर्च करना है तथा पच्चीस फिसदी अस्पताल के कर्मचारियों के उत्साहवर्धन आदि मे खर्च किया जाना है।
ओपीडी का लेवल अन्य पीएचसी से उपर-
पीएचसी सरवानिया महाराज मे रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या अन्य पीएचसी से अधिक है। यहां की नियमित सेवाएं और बेहतर प्रबंधन आम लोगों मे सरकारी अस्पताल के प्रति विश्वास को बनाए हुए है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रभूराम चोधरी के हाथों अवार्ड-
सरवानिया महाराज के पीएचसी को कायाकल्प योजना मे पुरस्कार मिलने के बाद राजधानी भोपाल मे पिछली 10 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री प्रभूराम चोधरी ने जिले के स्वास्थ्य मुखिया को इस आशय का अवार्ड प्रदान किया। जिले मे सरवानिया महाराज, डिकेन, सिंगोली के स्वास्थ्य केंद्रों को भी यह अवार्ड मिला है। सभी जगह राशि अलग अलग है।
कोविड 19 प्रथम व द्वितीय मे उत्कृष्ट सेवा-
जब विश्व मे कोविड का वायरस फैला तो पीएचसी सरवानिया ने अंचल मे उतकृष्ट सेवाएं दी और जब दुसरी बार कोविड 19 आया तो यहां सरकारी स्कूल को कोविड सेंटर बनाया गया था तब इस अस्पताल के बड़े से बड़े कर्मचारी और छोटे से छोटे कर्मचारी ने कोविड संक्रमण से ग्रस्त लोगों की सेवा मे जी जान से जुट गये थे। वो सेवाएं एक मिसाल के रुप मे आज भी देखी जाती थी। तब यहां पदस्थ डाक्टरों ने दिन रात एक कर दी थी।
बेहतरीन सेवाओं के लिए जाना जाता है-
वर्ष 2014 से पहले इस सरकारी अस्पताल की गिनती घटीया और केवल खानापूर्ति के रुप मे की जाती थी। डाक्टरों का अनियंत्रण और कंम्पाउडर का कब्जा इस अस्पताल की पहचान बन चुकी थी, लेकिन एक दिन ऐसा आया और शहर के लोग इस असपताल कि बेहतर सेवाओं के लिए आगे आकर लामबंद हुवे लंबा सघर्ष किया। तात्कालिक जिला कलेक्टर विकास सिंह नरवाल ने यहां कि शिकायतों के मद्देनजर एक जांच कमेटी गठीत कर जांच कराई जिसमें कई अनियमितता सामने आई तब यंहा मिडिया कर्मियों और राजनीतिक और सामाजिक लोगों के दखल से आमूल चूल परिवर्तन हुआ। उसके बाद से मेडिकल आफिसर की नियुक्ति से लगाकर अच्छे स्टाफ को तैनात किया गया था। जिसके परिणाम स्वरूप यहां की ओपीडी और स्वास्थ्य सेवाओं बहुत हद तक सुधरी। अब यह सरकारी अस्पताल कायाकल्प अवार्ड के लिए चयनित हुआ है निश्चित ही गर्व का विषय है।