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July 17, 2023, 11:25 am
BIG NEWS : अतिप्राचीन काल से दुर्लभ कल्पवृक्ष की श्रावण महीने में होती है विशेष पूजा, सुबह से लगती है भक्तों की भीड़, आज महाआरती के बाद होगी प्रसादी वितरण, पढ़े कमलेश प्रजापति की खबर     

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गरोठ। तहसील के ग्राम कोटडाबुजुर्ग में अतिप्राचीन काल से एक दुर्लभ वृक्ष है। जिसे कल्पवृक्ष के नाम से जाना जाता है। लोग इसकी शिव पार्वती के जोडे के रुप में पुजा करते है। 
ग्रामीणों के अनुसार बताया गया है कि यह वृक्ष करीब 1000 साल पुराना है। यहां पर दुरदराज से लोग दर्शन करने पहुंचते है। खासकर श्रावण मास के पुरे महीने में दर्शनाथियो का आना जाना लगा रहता है। यहां पर श्रावण मास के हर सोमवार को महाआरती का आयोजन होता है। वहीं ग्रामीणों के अनुसार बताया गया है कि इस विशाल कल्पवृक्ष के उपर जेसे गाय, बकरी हाथी, शेर, आदि जानवरो के पैरो के निशान प्रचानीकाल से ही है और वहीं यहाँ दिनभर भजन कीर्तन होते रहते है।  हरियाली अमावस्या के पर्व पर बालिकाओं द्वारा सामुहिक महामृत्युंजय मंत्रो उंचारण किया गया। यहां सुबह चार बजे से पुजा अर्चना करने का दौर चलता है जो दिनभर तक जारी रहता है। शाम को महाआरती कर महा प्रसादी का आयोजन किया गया है।  
पुराणों मे कल्पवृक्ष का उल्लेख मिलता है। कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्मग्रंथों और हिंदु मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो इच्छा करता है, वह पुर्ण हो जाती है, क्योंकि इस वृक्ष में अपार सकारात्मक उर्जा होती है। पुराणो के अनुसार समुद्र मंथन के 14 रत्नो में से एक कल्पवृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। समुद्र मंथन से प्राप्त यह वृक्ष देवराज इंद्र को दे दिया गया था। इंद्र ने इसकी स्थापना, सुरकानन वन (हिमालय के उत्तर में) कर दी थी। पद्मपुराण के अनुसार पारिजात की कल्पतरु है। 

वृक्षों और जड़ी-बुटी जानकारो के मुताबिक यह बेहद मोटे तने वाला एक फलदार वृक्ष है। जिसका टहनी लंबी और पत्ते लंबे होते है। दरअसल, यह वृक्ष पीपल के वृक्ष की तरह फैलता है और इसके पत्ते कुछ-कुछ आम के पत्तो की तरह होते है। इसका फल नारियल के आकार जैसा होता है, जो वृक्ष कि पतली टहनी के सहारे नीचे लटकता रहता है। इसका तना देखने पर बरगद के पेड़ जैसा दिखाई देता है। इसका फुल कमल के फुल रखी किसी छोटी सी गेंद से निकले असंख्य रुओ कि तरह होता है। पीपल की तरह ही कम पानी में यह वृक्ष फलता-फुलता है। सदाबहार रहने वाले इस कल्पवृक्ष की पत्तियां बारले ही गिरती है। इसे पतझड वृक्ष भी कहा जाता है। 
यह एक परोपकारी मेडिसन प्लांट है। अर्थात दवा देने वाला वृक्ष है। इसमे संतरे को 6 गुना ज्यादा विटामीन सी होता है। गाय के दुध से दोगुना कैल्शियम होता है और इसमे सभी तरह के विटामीन पाये जाते है। इसकी पत्ती को धोकर सुखी या पानी मे उबालकर खाया जा सकता है। पेड़ की छाल और फुल का उपयोग ओषधी तैयार करने के लिए किया जाता है। 

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