नीमच। सांसारिक आसक्ति के भाव को त्यागना चाहिए। मनुष्य को जन्म में ही सत्कर्म करने का पुण्य प्राप्त होता है। अन्य जन्मों में नहीं। पुण्य कर्म करने से पाप कर्मों का क्षय होता है। लक्ष्मी रूपी संपत्ति आज है कल नहीं। इसलिए इसका सुपात्र को दान कर सदुपयोग करना चाहिए तभी जीवन का कल्याण होता है। लक्ष्मी रूपी धन संपत्ति की कृपा जिस पर हो उसका कल्याण हो जाता है जिस पर नहीं हो वह करोड़पति से रोड़पति बन जाता है। न्याय और नीति पूर्वक कमाया धन ही दान करना चाहिए तभी आत्म कल्याण का मार्ग मिल सकता है। अन्याय और अनीति से कमाया धन कभी भी धर्म कार्य में नहीं लगाना चाहिए। पुण्य कर्म नहीं मिलता है। यह बात जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय, पूज्य प्रवर्तक, आगम मनस्वी साहित्य भूषण कविरत्न श्री विजयमुनिजी मसा ने कही।
वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के तत्वावधान में गांधी वाटिका के सामने जैन दिवाकर भवन में आयोजित चातुर्मास धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महावीर के बताए उपदेशों पर चलकर युवा अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। इस अवसर पर संत अभिजीत मुनि महाराज ने शुक विपाक शास्त्र के वर्तमान परिपेक्ष्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य सत्कर्म कर पुण्य का उपार्जन कर आत्मा के सुखों को प्राप्त करता है तभी उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।इस अवसर पर साध्वी डॉ विजय श्री सुमन जी महाराज साहब ने हरियाली अमावस्या के वर्तमान परिप्रेक्ष्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिपावली अमावस पर महावीर का निर्वाण हुआ था।संसार के लोगों को अंधेरे से उजाले की ओर जाने का मार्ग प्रशस्त कर संसार को पुण्य कर्मों की शिक्षा प्रदान की थी। सीतामाता 14 वर्ष तक वृक्ष के नीचे रही। माता अंजलि ने 12 वर्ष तक वन में भ्रमण किया। फिर तो मैं समोशरण की रचना भी वृक्षों के नीचे हुई है।हनुमान जी द्वारा लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाई गई थी वह भी एक वृक्ष से बनी औषधि थी। इसलिए वृक्षों का जीवन में बहुत महत्व है। चतुर्विद संघ की उपस्थिति में चतुर्मास काल तपस्या साधना निरंतर प्रवाहित हो रही है।
धर्म सभा में उपप्रवर्तक श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा.एवं डा. साध्वी विजय सुमन श्री जी म. सा. का सानिध्य मिला।इस अवसर पर श्री अभिजीतमुनिजी म. सा., श्री अरिहंतमुनिजी म. सा., ठाणा 4 व अरिहंत आराधिका तपस्विनी श्री विजया श्रीजी म. सा. आदि ठाणा का सानिध्य मिला। प्रभावती पितलिया एवं रविंद्र पप्पू बम के 8 उपवास पूर्ण। इस अवसर पर रविंद्र पप्पू बम एवं प्रभा पितलिया द्वारा 8 उपवास की तपस्या पूर्ण की गई है। आगे बढ़ने के भाव है।
चातुर्मासिक मंगल धर्मसभा में सैकड़ों समाज जनों ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर इंद्र सिंह बाफना, अम्बालाल रांका चित्तौड़गढ़, श्री संघ अध्यक्ष अजीत कुमार बम्म, चातुर्मास समिति संयोजक बलवंत सिंह मेहता, सागरमल सहलोत, मनोहर शम्भु बम्म, सुनील लाला बम्ब, निर्मल पितलिया, सुरेंद्र बम्म ,वर्धमान स्थानकवासी नवयुवक मंडल अध्यक्ष संजय डांगी, दिवाकर महिला मंडल अध्यक्ष रानी राणा ,साधना बहू मंडल अध्यक्ष सविता भामावत आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। इंदौर रतलाम, जावद जीरन, चित्तौड़गढ़, छोटी सादड़ी निंबाहेड़ा जावरा नारायणगढ़, उदयपुर आदि क्षेत्र से समाज जन सहभागी बने और संत दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्म सभा का संचालन प्रवक्ता भंवरलाल देशलहरा ने किया।