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July 17, 2023, 8:28 pm
KHABAR : जैन भवन में आयोजित धर्मसभा में समाजजनों को मिला आचार्य प्रसन्नचंद्र सागर का सान्निध्य, बोले- धर्म संस्कृति की रक्षा में तीर्थ का योगदान महत्वपूर्ण होता है, पढ़े खबर 

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नीमच। तीर्थ स्थानों की पवित्रता से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। तीर्थों की पवित्रता के लिए सरकार को भी सहयोग करना चाहिए । तीर्थ दर्शन करने से मन काया वचन में पवित्रता आती है। जीवन में दया भाव आता है और इसी कारण जीवन में सुख शांति का परिवर्तन आता है। संस्कृति की रक्षा में तीर्थ का योगदान महत्वपूर्ण होता है।
यह बातश्री जैन श्वेतांबर भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में बंधू बेलडी पूज्य आचार्य श्री जिनचंद्र सागरजी मसा के शिष्य रत्न नूतन आचार्य श्री प्रसन्नचंद्र सागरजी मसा ने कही। 
वे चातुर्मास  के उपलक्ष्य में मिडिल स्कूल मैदान के समीप जैन भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब गर्भ में जन्म लेता है तभी से संस्कार सीखता है इसलिए  गर्भवती माता को बच्चे के जन्म के साथ ही धार धर्म ग्रंथ की पुस्तकों का अध्ययन और घर परिवार में धैर्य पूर्वक जीवन जीना जीना चाहिए ताकि जो बच्चा जन्म ले वह भी धैर्यवान और मर्यादा पुरुषोत्तम और महान बन सके। उत्तरा के गर्भ में अभिमन्यु ने जन्म से पूर्व ही चक्रव्यू में प्रवेश करना सीख लिया था लेकिन उस से बाहर निकलना सीखते समय अभिमन्यु की माता को नींद आ गई थी इसी कारण अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाया और वीरगति को प्राप्त हुआ था। श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी  ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी  चातुर्मासिक सानिध्य मिला।पूज्य आचार्य भगवंत का आचार्य पदवी के बाद प्रथम चातुर्मास नीमच में हो  रहा है। उपवास, एकासना, बियासना, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है। धर्मसभा में जावद ,जीरन, मनासा, नयागांव, जमुनिया,जावी, आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु भक्त  सहभागी बने। धर्मसभा का संचालन सचिव मनीष कोठारी ने किया।

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