सरवानिया महाराज। हकीकत क्या है ये बहुत कम लोगों की जानकारी मे है इस मंदिर को किसी ने बनाया नहीं बल्कि लोगों की मान्यता है कि यह मंदिर उड़ कर आया था। ऐसे लोगों के कथन है। ये बात अलग है कि इसका इतिहास बहुत पुराना है लेकिन गांव की बसाहट कोई सवा सो साल पूरानी है।
हम बात कर रहे है अरावली पर्वतमाला से लगे बसे गांव खेड़ा मोड़ी की जो की ग्राम पंचायत उपरेड़ा का हिस्सा है। इस गांव मे जाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने पक्की सड़क बनाई हुई है। दो कच्चे रास्ते भी है जो सीधे उपरेड़ा और नानपुरिया से जुड़ते है। पक्की सड़क ग्राम मोड़ी से होकर खेड़ा मोड़ी जाती है। यही बेहतर मार्ग है इस मंदिर पर पहुचनें का।
यंहा एक शिव मंदिर है जिसे जानकर लोग हजार ग्यारह सो साल पुराना बताते हैं। इस शिव मंदिर मे बड़ें आकार का शिवलिंग और जलाधारी स्थित है। लेकिन प्रचार प्रसार के अभाव मे बहुत कम लोग ही यंहा पंहुचते है। कारण आम लोगों मे इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी लगने पर पत्रकार दिनेश वीरवाल, राजेश प्रतापसिंह राणावत, जयप्रकाश मालू, अभयकुमार जैन, रघुवीरसिंह राणावत, राजेश सांवरिया बैण्ड, भूदेव पाल ने ग्राम खेड़ा मोड़ी पहुंचकर शिव मंदिर मे विराजमान भोलेनाथ के दर्शन कर इस मंदिर के इतिहास और गांव की बसाहट के बारे मे जाना।
इस मंदिर के पास खंडित मुर्तिया भी रखी हुई है जिन्हें देख लगता है पुरातत्व महत्व की ऐतिहासिक मुर्तिया है। इस मंदिर को खोर के नो तोरण वराह मंदिर और बरुखेड़ा के शिव मंदिर से जोड़कर लोग देखते है। यंहा पुजा करने वाले पुजारी मांगुदास वैष्णव बताते है कि हमारा परिवार यंहा पुजा करता चला आरहा है। गांव बहुत छोटा है लेकिन शिवलिंग और शिव महिमा बहुत बड़ी है।
प्राचीनकाल का मंदिर, इतिहास गवाह-
यह शिव मंदिर बाहर से देखने मे कुछ ख़ास नजर नहीं आता लेकिन जैसे ही गर्भगृह की और नजर पड़ती है तो नजर शिव बाबा से हटाने का मन नहीं करता। बाबा महाकाल के आकार का बड़ा शिवलिंग और जलाधारी नजर पड़ते ही देखने वालों की आंखों मे बस जाते है। प्राचीनकाल की स्थापत्य कला और पुरातात्विक महत्व की शैली इस मंदिर को देखने पर नजर आती है। इसका इतिहास खुद गवाह है।
चार सो की आबादी, मंदिर गांव से पहले का-
ग्राम पंचायत उपरेड़ा के सरपंच शिवनारायण पाटीदार ने बताया कि प्राचीन काल का मंदिर है जो उड़कर आया है। ग्राम खेड़ा मोड़ी की आबादी करीब चार सो तथा मतदाता तीन सो आठ है। तात्कालिक कांग्रेस शासन मे पूर्व मंत्री घनश्याम पाटीदार ने दो लाख रुपये स्विकृत किये थे जिनसे मंदिर का रख रखाव बरांडा व परिक्रमा का काम कराया गया था। मोड़ी उपरेड़ा नानपुरिया केलूखेड़ा के श्रृद्धालु यंहा आते है। अगर शासन और प्रशासन इस और ध्यान दे तो यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के साथ साल जिले भर के लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन जायेगा।