मंदसौर। जिले में अशासकीय विद्यालय संचालक अपनी मांगों को लेकर वाहन रैली के रूप में आज बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अशासकीय विद्यालयों के संचालकों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार की योजना को केवल कुछ राज्यों में ही लागू किया जा रहा हैं। जैसे राजस्थान, गुजरात, एमपी में क्यों सौतेला व्यवहार किया जा रहा हैं।
प्राइवेट एसोसिएशन रूपेश पारिख ने बताया कि हमारी सरकार से 5 मुख्य मांगे हैं जिसमे पहली मांग है कि आरटी का पैसा हमे तत्काल उसी सत्र में दिया जाए अन्य राज्यो में 15 हजार रूपए 20 हजार रूपए फीस प्रति भीति है एमपी में सिर्फ 5 हजार रूपए है एमपी में भी इसे 15 हजार रूपए करने चाहिए समनता शुल्क 100 रुपए लगता था कोविड से पहले सरकार ने उसे भी 15 हजार रूपए कर दिया है उसको हटाया जाए जो राजिस्ट्रेट किराया नामा मांगा जा रहा है यह वेवहारिक नही है इस किराएनामे को बनाने में 40 से 50 हजार रूपए का खर्च आता है जो की आर्थिक रूप से पिछड़े हुए स्कूल वहन नहीं कर सकते हैं और स्कूल मान्यता के नियमों में सरलता की जाए अगर सरकार द्वारा हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के स्कूल संचालकों द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।