जबलपुर। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की आमला विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव की तैयारी कर रही डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे के इस्तीफे का विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में निशा बांगरे की ओर से याचिका दाखिल की गई है। कांग्रेस पार्टी के नेता एवं बहुचर्चित अधिवक्ता विवेक तंखा, निशा बांगरे की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी करेंगे।
राज्य प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी निशा बांगरे, छतरपुर जिले के लवकुश नगर में एसडीएम के पद पर पदस्थ थी। इसी दौरान अखबारों में एक खबर छपी कि, कांग्रेस पार्टी के द्वारा कराए गए एक सर्वे में बैतूल जिले की आमला विधानसभा के लोग निशा बांगरे को अपना विधायक चुनना चाहते हैं। डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने इन समाचारों पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की अतः माना गया कि समाचार सही है। इसके बाद निशा बांगरे ने संतान पालन अवकाश लिया। निशा का मायका बालाघाट में और ससुराल गुरुग्राम हरियाणा में है, लेकिन छुट्टी लेकर निशा बांगरे आमला विधानसभा क्षेत्र पहुंची। यहां उन्होंने अपना घर बनाया। उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्हाट्सएप ग्रुप अपडेट से स्पष्ट हुआ कि वह विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के बहाने से जनसंपर्क कर रही हैं। ज्यादातर समय जनता के बीच बता रही हैं।
एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन को लेकर मध्यप्रदेश शासन और निशा बांगरे के बीच विवाद की स्थिति बन गई। निशा बांगरे ने राज्य प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया परंतु शासन की ओर से उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तंखा उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि दिनांक 22 जून को इस्तीफा भेज दिया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग को 22 जुलाई तक मंजूर करना था परंतु सामान्य प्रशासन विभाग में अब तक कोई फैसला नहीं दिया है। इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में नोटिस जारी करके सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देशित किया है कि वह आगामी 1 महीने के भीतर निशा बांगरे के इस्तीफे पर निर्णय करें।