मोरवन। बड़े मंदिर प्रांगण मोरवन में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह हुआ। शनिवार झाड़ेश्वर धाम विष्णु शरण जी महाराज ने श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की अमृत वर्षा कर श्रद्धालुओं को रसपान कराया। कथा के छठे दिन विष्णु शरण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का वर्णन किया।उन्होंने कहा कि भगवान की लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए महाराज जी ने कहा कि रुक्मणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह नहीं सकती यदि जीव अपने धन को भगवान के काम में लगाए व अपने धन को प्रमार्थ में लगाना चाहिए जिससे धन की वृद्धि होती है जब कोई लक्ष्मीनारायण को पूछता है या उसकी सेवा करता है तो उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद स्वत ही प्राप्त हो जाती है विष्णु शरण जी महाराज ने आगे कहा है भगवान प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गईं। कहने लगी हे कन्हैया जब आपको हमें छोड़कर ही जाना था तो हम से प्रेम क्यों किया। गोपी उद्धव संवाद, श्री कृष्ण एवं रुकमणी विवाह उत्सव पर मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई। साथ ही तेरा किसने किया सिंगार सांवरे,मेरे श्याम की शादी है आदि भजनों की प्रस्तुति दी गई जिसमें श्रद्धालु भक्तजन खूब थिरके ।भगवान श्री कृष्ण रुकमणी जी के विवाह में समस्त श्रद्धालुओं ने फूलों की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा कर भगवान श्री कृष्ण व रुक्मणी जी के विवाह में शामिल होकर अपने आप को भावविभोर कर दिया।
रविवार को श्रीमद् भागवत कथा का सातवां दिन व कथा की पूर्णाहुति होने के बाद हवन पूजन कर महा प्रसादी का वितरण होगा समिति के सदस्यों ने सभी भक्तजनों से पधारने का आग्रह किया है।