रतलाम। जनसुनवाई के दौरान सुनवाई नहीं होने पर एक बुजुर्ग दंपति धरने पर बैठ गए। बुजुर्ग माता-पिता अपने ही बेटे के आतंक से निजात दिलाने की मांग को लेकर प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों से सहायता नहीं मिलने पर कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। दोनों बुजुर्ग कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मिले बिना वापस नहीं जाने की जिद पर अड़ गए।
दोनों मावता गांव के रहने वाले पन्नालाल प्रजापति और शांतिबाई है। जो अपने पुत्र से परेशान होकर रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे थे । जनसुनवाई में कलक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की गैर मौजूदगी में हो रही रस्म अदायगी से परेशान होकर बुजुर्ग दंपत्ति कार्यालय के बाहर सीढ़ियों पर बैठ गए। दो घण्टे तक बुजुर्ग दम्पति कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर ही बैठे रहे लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली। इसके बाद नायब तहसीलदार ने उन्हें संबंधित थाने पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवाने को कहा है।
दरअसल रतलाम कलेक्टर कार्यालय के बाहर सीढ़ियों पर हाथों में तख्तियां लेकर बैठे बुजुर्ग दंपति कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के मावता के पन्नलाल प्रजापति और उनकी पत्नी शांतिबाई है। जिन्होंने यह आरोप लगाया कि उनके पुत्र शिव नारायण प्रजापत ने उन्हें मारपीट कर घर और जमीन से बेदखल कर दीया है। पुलिस थाने से लेकर सभी शासकीय कार्यालयों में न्याय की गुहार लगाने के बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है। इस वजह से वह कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मिलने रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे है। लेकिन रतलाम कलेक्ट्रेट कार्यालय में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की अनुपस्थिति में सभी अधिकारी अवकाश मोड पर चले जाते हैं। और यही हालत जनसुनवाई में भी होती है। यही वजह रही कि 2 घंटे तक कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे इस बुजुर्ग दंपत्ति से इनकी समस्या सुनने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। बहरहाल बुजुर्ग दंपत्ति ने न्याय नहीं मिलने तक कलेक्ट्रेट परिसर में ही रुकने का फैसला किया है। बुजुर्ग दंपत्ति का कहना है कि वह कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मिले बिना वापस घर नहीं जाएंगे।