इंदौर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने नर्मदा सहित अन्य नदियों में प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। एनजीटी ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय मापदंडों के उल्लंघन को उतनी ही गंभीरता से लेने की आवश्यकता है जितनी कि हत्या और हमलों के अपराधों को रोकना।
एनजीटी के जस्टिस शेओ कुमार और डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की है। एनजीटी ने यह टिप्पणी सम्यक जैन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। गंभीर प्रदूषण पैदा करने और नदी में अनुपचारित सीवेज को रोकने में विफल रहने के लिए राज्य और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि नदी किनारों पर अवैध निर्माण नदी के पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जल निकाय के किनारों पर अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं
जल निकायों पर कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। नदी किनारों का सीमांकन होना चाहिए। अतिक्रमण होता है, तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम भी लागू किया जाएगा। उपचारित पानी के पुनरू उपयोग के लिए कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, कृषि, औद्योगिक या किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने संयुक्त समिति की सिफारिश को भी स्वीकार किया है। ट्रीटमेंट वाले पानी को नदी में नहीं छोड़े जाने की बात भी कही है। मुख्य सचिव और राष्ट्रीय स्तर पर सीएमसी समय-समय पर प्रगति की निगरानी करेंगे।
कैचमेंट एरिया में नो डेवलपमेंट जोन हो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि नर्मदा नदी एक पवित्र नदी है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। कैचमेंट एरिया नदी का अभिन्न अंग होता है। इसके महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन हिस्सों में नो डेवलपमेंट जोन, रेगुलेटेड जोन और विकास के लिए मुक्त जोन हो।
कान्ह-सरस्वती पर भी मिल चुके निर्देश
एनजीटी ने कान्ह-सरस्वती नदी में बहने वाली गंदगी और इसमें स्वच्छ पानी के बहाव के लिए भी अलग-अलग समय पर आदेश दिए। एनजीटी ने नदी में बहाए जाने वाले केमिकल और गंदे पानी की रोकथाम पर भी दिशा-निर्देश दिए, जिस पर नगर निगम ने कार्रवाइयां शुरू की।