BREAKING NEWS
KHABAR : जल गंगा संवर्धन अभियान का भव्य समापन,.. <<     NEWS : क्रेटा लूटकांड का इनामी आरोपी गिरफ्तार,.. <<     शाजापुर में सफाई व्यवस्था पर फूटा गुस्सा,.. <<     BIG NEWS : चित्तौड़गढ़ की कोतवाली पुलिस की बड़ी.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     KHABAR : राजगढ़ में सेफ क्लिक 2.0 अभियान, नुक्कड़ नाटक.. <<     KHABAR : शाजापुर में ट्रैफिक पुलिस गायब! आम नागरिक.. <<     KHABAR : बारिश बनी काल, उफनते नाले में बहे चालक का.. <<     KHABAR : हेमंत शर्मा बने मध्यप्रदेश श्रमजीवी.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     KHABAR : सफाई व्यवस्था पर फूटा गुस्सा, महिलाओं ने.. <<     BIG REPORT : नीमच की जनसुनवाई में अपर कलेक्टर बीएस.. <<     BIG NEWS : कांग्रेस में फिर वॉकआउट का खेल, पहले.. <<     BIG REPORT : मंदसौर पुलिस कंट्रोल रूम में जनसुनवाई,.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     KHABAR : बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की विधानसभा बैतूल.. <<     KHABAR : खरगोन में पेंशनर्स का हुंकार, 5 लाख.. <<     खरगोन में आबकारी का बड़ा एक्शन, लाखों की अवैध.. <<     VIDEO NEWS: सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल!,सीमांकन के.. <<     KHABAR : सामुदायिक भवन निर्माण की राशि स्वीकृत.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
November 5, 2023, 11:19 am
KHABAR : चातुर्मासिक मंगल धर्म सभा में उमड़ रही समाजजनों की भीड़, आचार्य प्रसन्नचंद्र सागरजी महाराज ने कहा- पवित्र और शुद्ध आहार मोक्ष द्वार का प्रथम प्रवेश द्वार, पढ़े खबर 

Share On:-

नीमच। मनुष्य जीवन में जैसा वह आहार ग्रहण करता है वैसे ही उसके विचार उत्पन्न होते हैं। आहार शुद्ध है तो सत्व शुद्ध है । जो इंद्रिय भी पवित्र रहती है।पांचों इंद्रिय पवित्र रहती है तो भक्ति तपस्या शांतिपूर्वक सफलता के साथ पूरी होती है।सत्व शुद्ध है तो सब कुछ शुद्ध होता है।आहार सात्विक है तो विचार भी सात्विक होंगे। यदि आहार तामसिक है तो  विचार भी तामसिक होंगे।इसलिए सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए ।तभी मन पवित्र होगा और पवित्र मन ही आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।यह बातश्री जैन श्वेतांबर भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में बंधू बेलडी पूज्य आचार्य श्री जिनचंद्र सागरजी मसा के शिष्य रत्न नूतन आचार्य श्री प्रसन्नचंद्र सागरजी मसा ने कही। वे चातुर्मास  के उपलक्ष्य में जाजू बिलिं्डग के समीप पुस्तक बाजार स्थित नवनिर्मित रेशम देवी अखें सिंह कोठारी आराधना भवनघ्  में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्मा के उत्थान के लिए मोह का त्याग करना आवश्यक होता है। सद्भावना ज्यादा  होगी पुरुषार्थ उतना ही ज्यादा होगा।घर परिवार में आदर प्रेम  सद्भाव ज्यादा होगा तभी सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे। जितना आदर ज्यादा होगा उतना ही पुरुषार्थ ज्यादा होगा। व्यक्ति हर कार्य के लिए सोचता है कि बाद में करूंगा इसी कारण व्यक्ति का जीवन पिछड़ जाता है। संसार में धर्म कर्मघ्  बिना समय गंवाए ही शीघ्र करना चाहिए तभी उसका फल मिलता है। संसार के प्रति राग रखेंगे तो धर्म कर्म पूर्ण नहीं हो सकता है। शरीर को महत्व देंगे तो राग बढ़ेगा जो क्रिया पाप करने वाली है ।इसका ज्ञान हमें होना चाहिए और जीव दया का पालन करते हुए संपूर्ण संसार में जीवन यापन करना चाहिए।जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है वैसे-वैसे उसे शुद्ध आहार का ज्ञान होता जाता है ।आहार से ही परिग्रह उत्पन्न होता है। इसलिए आहार शुद्ध होना चाहिए।तेल घी और घरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए तभी भक्ति और तपस्या हो सकती है। सच्चे श्रावक को जमीन कंद त्याग कर रात्रि भोज का त्याग करना चाहिए तभी उसके जीवन का कल्याण हो सकता है।वृक्ष का पानी से, पशु का पेट से ,और श्रावक का धर्म पूर्ण विवेक से जीवन सफल होता है।
श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी  चातुर्मासिक सानिध्य मिला। समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उपवास, एकासना, बियासना, आयम्बिल, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है।धर्मसभा का संचालन सचिव मनीष कोठारी ने किया।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE