भोेपाल। अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था भोपाल शनिवार को विश्व संवाद केंद्र शिवाजी नगर में नाटक श्सनातनी भिक्षु चिक्का पूंश् का मंचन करने जा रहा है। जिसकी कहानी संस्कृति पर आधारित है। नाटक का हीरो श्सनातनी भिक्षुश् संस्कृति के पतन पर चिंता व्यक्त करता है और उसे बचाने का संकल्प लेकर संस्कृति की रक्षा के लिए भिक्षु बनता है। गांव-गांव जाकर भिक्षावृत्ति करता है और इस माध्यम से अपने विचार समाज तक पहुंचाता है।
इस नाटक का शीर्षक चिक्का पूं है। जिसका तात्पर्य चिक (पर्दे) के पीछे पूनम का सनातनी चांद छिपता हुआ है। इसमें लेखक डॉ. गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ खलनायक पागल की भूमिका में हैं। उन्हीं ने नाटक का निर्देशन किया है। सुरेश पटवा सनातनी भिक्षु बने हैं और डॉ. सुधा दुबे सनातनी भिक्षुणी बनी हैं। कला मंदिर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में देवेन्द्र कुमार जैन सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुख्य अतिथि और डॉ. उषा खरे (स्वीप आइकॉन) प्राचार्य शासकीय कन्या उमावि विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में कला मंदिर के उपाध्यक्ष हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, विनोद कुमार जैन सेवानिवृत्त अपर महाप्रबंधक भेल सहित अन्य उपस्थित रहेंगे।
नाटक में भिक्षुणी सुधा ने धर्म ग्रंथों की हो रही अनदेखी, सनातन मूल्यों के क्षरण पर भिक्षाम देहि कहते अभिनय किया। खलनायक डॉ. गौरीश ने मुखौटा ओढ़े वर्तमान संस्कृति पर कटाक्ष किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि हम सभी काले हैं दिखावे के लिहाफ डाले हैं। गुनाहों के जाम पीकर जिंदा हैं, गले में नैतिकता का ताबीज डाले हैं, सच की जुबां पर ताले हैं। इस तरह सनातन की रक्षार्थ प्रहसन का अंत करते नमामि शमीशान निर्वाण रूपं से अंत होता है।