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January 12, 2024, 6:39 pm
NEWS :  मकर संक्रांति पर घोड़े पर सवार होकर आयेंगे सूर्य देव -डॉ मृत्युञ्जय तिवारी, 14 जनवरी की रात संक्रांति होने से 15 को स्नान दान के लिए पुण्यकाल, पढे़ रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। इस बार साल 2024 में मकर संक्रांति का वाहन अश्व है यानी कि मकर संक्रांति पर सूर्य देव अश्‍व पर सवार होकर आ रहे हैं। इसका बड़ा असर देश दुनिया पर देखने को मिलेगा। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि जब भी संक्रान्ति का वाहन घोड़ा और उपवाहन सिंह होता है तब समाज में आराजकता लोक में भय और  जब सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि पर जाते हैं तो उस काल को संक्रांति कहते हैं। इस प्रकार वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं। इनमें से कुछ संक्रांतियों को पर्व के रूप में मनाया जाता है, जब सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं। वर्ष 2024 में यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर संक्रान्ति के दिन गंगा स्नान, सूर्याेपासना व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान विशेष पुण्यकारी होता है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनरू प्राप्त होता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगा स्नान एवं गंगा तट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थ राज प्रयाग एवं गंगा सागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। मकर संक्रांति के दिन तिल का बहुत महत्व है। कहते हैं कि तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल के तेल द्वारा शरीर में मालिश, तिल से ही यज्ञ में आहुति, तिल मिश्रित जल का पान, तिल का भोजन इनके प्रयोग से मकर संक्रांति का पुण्य फल प्राप्त होता है और पाप नष्ट हो जाते हैं। आयुर्वेद में तिल को कफ नाशक, पुष्टिवर्धक और तीव्र असर कारक औषधि के रूप में जाना जाता है। यह स्वभाव से गर्म होता है इसलिए इसे सर्दियों में मिठाई के रूप में खाया जाता है। गजक, रेवड़ियां और लड्डू शीतऋतु में ऊष्मा प्रदान करते हैं। मकर संक्रांति को अनेक स्थानों पर पतंग महोत्सव मनाए जाते हैं। प्राचीन भारतीय साहित्य में भी पतंग उड़ाने का उल्लेख मिलता है। रामचरित् मानस के बालकाण्ड में श्री राम के पतंग उड़ाने का वर्णन है- श्राम इक दिन चंग उड़ाई, इन्द्र लोक में पहुंची जाई।श् बड़ा ही रोचक प्रसंग है। पंपापुर से हनुमान जी को बुलवाया गया था, तब हनुमान जी बाल रूप में थे। जब वे आए, तब श्मकर संक्रांतिश् का पर्व था, संभवतः इसीलिए भारत के अनेक नगरों में मकर संक्रांति को पतंग उड़ाने की परम्परा है। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्य वर्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अतः पतंग उड़ाने का एक उद्देश्य कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना भी है।

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