सेगांव। अखिल विश्व गायत्री परिवार युग तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वाधान में नगर में पांच दिवसीय पावन प्रज्ञा पुराण का आयोजन गायत्री परिवार ट्रस्ट सेगांव के माध्यम से किया जा रहा है।
समय तो अपनी गति से चल रहा है। बस हमें भी समय के साथ अपने को बदलने कर चलना होगा, समय के साथ कदम ताल मिलाकर सद्कार्यों में समय को नियोजित करना होगा। जो अवसर को पहचान लेता है। वह ईश्वर से सौभाग्य श्रेष्ठ अनुदान वरदान प्राप्त कर लेता है। जो समय के अवसरों को चूक जाता है। वह हमेशा घाटे में रहता है। पूरी जिंदगी पछताता है। यह तो सौभाग्य के पल है। की हमे मनुष्य जीवन मिला है। यह बात शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि के रूप मे आई श्रीमद प्रज्ञा पुराण वाचिक ब्रम्हवादिनी बहन सुनीता जीजी ने अपने गुरु सन्देश में सोमवार रात्रि को प्रज्ञा पुराण के द्वितीय दिवस पर कही। आगे बताया की यह समय वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी वर्ष के रूप मे चल रहा है। इसमें नारी की शक्ति को जन जागृति की ओर ले जाकर नई चेतना को जगा कर मातृशक्ति को जागृत कर पूरे विश्व को एक नई दिशा धारा प्रधान करना है। वर्ष 2026 में तीन बड़े संजोग बना रहे हैं, वंदनीय माता जी की जन्म शताब्दी पर अखंड दीप जो गुरुदेव ने 15 वर्ष की उम्र में अखंड दीप को प्रज्वलित करके अपनी साधना को प्रारंभ किया था। जिसे 100 वर्ष हो गए हैं। और महर्षि अरविंद की अति मानव की जो अवधारणा की जो प्रक्रिया की थी। उसे भी 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस हेतु तीन वर्ष से गायत्री परिजन साधना का क्रम चला रहे है, उसी के अंतर्गत यह क्रम चल रहा है। जिसमे प्रज्ञा पुराण कथा 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव मनाने का हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। दीदी ने अपनी कथा में आगे बताया कि मनुष्य के संकल्पों में हजारों हाथी का बाल होता है। मनुष्य का निर्माण उसके मन से होता है। जितनी भी समस्याएं दिख रही है। वह मनुष्य के मन की जड़ के अंदर से उत्पन्न हुईं है। अनाचार अत्याचार आदि का जो कारण है। वह मनुष्य के मन के अंदर ही छुपा हुआ है। अब मनुष्य का मन बदल गया है, संकुचित हो गया है। इस कारण मनुष्य पशुओं जैसा जीवन व्यापम कर रहा है।आज आवश्यकता है। हमे अपने आप को पहचानने की मन व जल की गति एक सी होती है। गुरुदेव ने हमारे मन को गायत्री के महामंत्र से जोड़ने के सूत्र दिए हैं।जिससे जीवन का कल्याण होगा,बस इसे हमे पहचानने की आवश्यकता है। इस संगीतमय प्रज्ञा पुराण में संगीत टोली में आई बहनों ने धरती की शान तू मनु की संतान तू......मनुष्य तू बडा महान है के संगीतमय गुरु संदेश पर कथा पंडाल तालियों से गुंज गया।
मंगलवार सुबह 8 बजे से 11 बजे तक नव कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन हुआ जहा गर्भरणीय सस्कार,नामकरण सस्कार,विद्यारम्भ सस्कार साथ ही गायत्री परिजनों का जनमोत्स्व मना कर कार्यक्रम संपन्न हुये। गायत्री मंत्रो के साथ गायत्री परिजनों ने जोड़े से महायज्ञ में भाग लिया। बड़ी संख्या में नगर सहित आस पास के गायत्री परिजन उपस्तित थे।