चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र प्रताप नगर में दादी गुलजार जी की तृतीय पुण्यतिथि मनाई गई। इस कार्यक्रम में सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने दादी के साथ जो उन्होंने अनुभव किया वह सभी के साथ साझा करते हुए कहा कि दादी सभी का स्नेह और सम्मान करती थी। दादी जी शांत व एकांत प्रिय आत्मा थी वह कभी हमें साधारण नहीं लगती थी हमें ऐसे लगता था कि बाप दादा उनके तन में विराजमान है। हम बहुत बार दादी जी को नजदीक से देखते थे तो महसूस होता था की दादी खुद अपना पुरुषार्थ करती थी। ऐसा नहीं की बाबा का रथ रथ है तो बाबा स्वर्ग की बादशाही दे देंगे दादी जी ज्ञान योग धरना सेवा सभी में नंबर वन थी। दादी जी छोटों को प्यार और बड़ों को रिकॉर्ड देती थी दादी जी में मालिक और बालकपन का बैलेंस दिखा वह बहुत महान थी। बड़ी दादी और गुलजार दादी का एक दूसरे के प्रति बहुत सम्मान था दादी बड़ी निर्माण चित्र व मिलनसार थी दादी बहुत यारी और प्यारी रहती थी। यह अनुभव हम सुनकर अपने जीवन में धारण करते चलना है, एक गुण भी धारण करेंगे तो सारे गुण हमें स्वतः आ जाएंगे। दादी कहते थे हम तो भगवान के बच्चे हैं तो हमारे चेहरे के चमक ऐसी हो जैसे दीदी दादियों के चेहरे पर विश्व महाराज की चमक है। इसके लिए बाबा कहते बीच-बीच में अपने संकल्पों को एकाग्र करने का अभ्यास करो। दादी कहती थी यदि आपको दिन में समय नहीं मिलता तो भी जब आप पानी पीते हैं तो बाबा की याद में रहो इसे हर घंटे में बीच-बीच में याद का समय निकालो कैसे लिंक जुड़ी रहेगी प्रयोग लगाने में मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। सभी भाई बहनों ने अपने श्रद्धा सुमन दादी जी को अर्पित किए और संकल्प लिया कि हम सभी दादी समान बनने का पुरुषार्थ करेंगे। पुण्यतिथि के अवसर पर सुबह 8 से रात को 8 बजे तक योग तपस्या रखी गई। बीके मधु बहन बीके अनिता बहन सुभाष पुरोहित गीता गर्ग अनीता पाल सावित्री बहन आदि उपस्थित रहे।