उज्जैन। चौत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर पितरों की शांति के लिए 7 अप्रैल रविवार को हजारों लोगों ने सिद्धवट पहुंचकर शिप्रा नदी में स्नान के बाद भगवान सिद्धनाथ का पूजन-अर्चन कर दुग्धाभिषेक किया। वहीं शिप्रा तट के घाट पर पितरों की शांति के लिए तर्पण कार्य किए। सुबह से ही यहां पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी।
चौत्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का महत्व होने के कारण इस दिन शिप्रा तट स्थित सिद्धवट मंदिर में भगवान सिद्धनाथ का दुग्धाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। मंदिर के पुजारी शिवम चतुर्वेदी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती द्वारा सिद्धवट लगाया गया था। यहां श्रद्धालुओं द्वारा वट वृक्ष पर दुग्धाभिषेक किया जाता है। देश में चार प्रमुख वट वृक्ष है, जिनमें सिद्धवट भी शामिल है। पितरों के मोक्ष और शांति के लिए देशभर के हजारों श्रद्धालु चतुर्दशी और अमावस्या पर यहां पहुंचते हैं। सुबह से श्रद्धालुओं की कतार सिद्धवट पर लग चुकी थी। लोगों ने शिप्रा नदी में स्नान के बाद सिद्धनाथ भगवान का पूजन कर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण, कर्मकांड भी कराया। हालांकि रविवार को अवकाश का दिन होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्धवट पहुंचे थे, जिसके कारण दिनभर रास्ते जाम होने की स्थिति बनी रही। श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक सिद्धवट मंदिर में लगी रही।