नीमच। भीषण गर्मी के इस दौर में जब पारा आसमान छू रहा है। ऐसे में बेजुबान पशुओं की पीड़ा को समझते हुए वीएसएसएस ग्रुप की महिला शाखा ने एक अनूठी पहल की है। इस नेक काम के तहत, वीएसएसएस ग्रुप ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की उचित व्यवस्था कराकर पशुओं की प्यास बुझाने का बीड़ा उठाया है। इस भीषण गर्मी के कारण जलस्रोत सूख रहे हैं, और ऐसे में सड़कों पर घूमने वाले बेजुबान पशुओं को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वीएसएसएस ग्रुप ने इस गंभीर समस्या की पहचान की और तुरंत कार्यवाही करने का निर्णय लिया। उन्होंने शहर के विभिन्न इलाकों में जानवरों के लिए बड़े-बड़े पानी के बर्तन रखवाए हैं, ताकि ये पशु अपनी प्यास बुझा सकें।
वीएसएसएस ग्रुप के सदस्य शहर के भीतर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं। इस पहल के तहत, कुल मिलाकर 5-10 से अधिक स्थानों पर पानी के बर्तन रखवाए गए हैं। इसके साथ ही, हर दिन इन बर्तनों में ताजा पानी भरा जाएगा ताकि पशुओं को स्वच्छ पानी मिल सके।
इस अभियान को सफल बनाने में सभी ग्रुप मेंबर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। स्थानीय निवासियों से अनुरोध किया है कि वो अपने-अपने घरों के बाहर पानी के बर्तन रखे हैं और नियमित रूप से उन्हें भरने का जिम्मा भी ले, वीएसएसएस ग्रुप ने लोगों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया, स्थानीय समाचार पत्रों का सहारा लिया। मौजूदा सदस्यों में अध्यक्ष रमेशजी केवलानी,प्रदेश अध्यक्ष किशनजी अंदानी, दीपक जी बुधवानी,राकेशजी अठवानी, दीपांशु वासवानी,नितिन जी उदासी, खुशबू अठवानी,जया अठवानी,दीपा पहेलाजानी, अंजली पहेलाजानी, गोदावरी लालवानी,मीनू लालवानी, भारती धामेचा, कविता मंगवानी,निशा आहुजा,सोनिया छाबड़ा सभी ने बताया कि इस पहल के पीछे उनकी प्रेरणा बेजुबान जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और दया की भावना है। उन्होंने कहा, ष्इन जानवरों का कोई अपना नहीं होता और गर्मी के इस कठिन समय में हमें इनकी मदद करनी चाहिए। पानी जीवन का मूल आधार है और हमें इसे हर जीव तक पहुंचाना चाहिए।
वीएसएसएस ग्रुप ने समाज से अपील की है कि वे भी इस अभियान में अपना योगदान दें और अपने आसपास के पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से हम बड़े बदलाव ला सकते हैं और बेजुबान पशुओं की पीड़ा को कम कर सकते हैं।
इस नेक पहल के लिए वीएसएसएस ग्रुप को समाज के हर वर्ग से सराहना मिल रही है। यह कदम न केवल पशुओं के लिए राहतकारी है, बल्कि मानवता की एक मिसाल भी है।