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July 10, 2026, 6:57 pm
REPORT : डॉग बाइट से बचाव और रेबीज रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी, घाव को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोएं, समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने की अपील, पढ़े खबर

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मंदसौर। जिले में कुत्तों के काटने (डॉग बाइट) की घटनाओं को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. चौहान ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि रेबीज 100 प्रतिशत घातक बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और टीकाकरण से इससे पूरी तरह बचाव संभव है।

घाव होने पर तुरंत करें ये उपाय-
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद पोविडोन आयोडीन या अन्य उपयुक्त एंटीसेप्टिक लगाएं और बिना देरी किए निकटतम शासकीय स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श लें।

चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) तथा आवश्यकता होने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) अवश्य लगवाएं। यदि काटने वाला कुत्ता पालतू है तो उसे 10 दिनों तक निगरानी में रखें और उसकी जानकारी चिकित्सक को दें। टीकाकरण का पूरा कोर्स निर्धारित समय पर पूरा करना भी आवश्यक है।

इन बातों से करें परहेज-
स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि घाव पर मिट्टी, हल्दी, तेल, मिर्च, राख, गोबर या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं। झाड़-फूंक या अप्रमाणित उपचार पर भरोसा न करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के घाव पर टांके न लगवाएं और उपचार या टीकाकरण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

डॉग बाइट से बचाव के उपाय-
आवारा कुत्तों को न छेड़ें, उन पर पत्थर न मारें और अनावश्यक रूप से उनके पास न जाएं। बच्चों को कुत्तों के साथ सुरक्षित व्यवहार की जानकारी दें। भोजन करते, सोते या अपने बच्चों के साथ मौजूद कुत्तों को परेशान न करें। पालतू कुत्तों का नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण कराएं तथा आवारा कुत्तों की जानकारी स्थानीय निकाय को देकर एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन कार्यक्रम में सहयोग करें।

रेबीज के लक्षण और जरूरी संदेश-
रेबीज के संभावित लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, घाव के स्थान पर दर्द या जलन, पानी पीने में कठिनाई (हाइड्रोफोबिया), हवा से डर लगना (एयरोफोबिया), अत्यधिक बेचैनी, भ्रम और अंततः लकवा शामिल हैं।

सीएमएचओ डॉ. चौहान ने कहा कि रेबीज के लक्षण दिखाई देने के बाद इसका प्रभावी उपचार संभव नहीं होता। इसलिए कुत्ते के काटते ही घाव को अच्छी तरह धोना और समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने बताया कि जिले की शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में एंटी-रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकता अनुसार रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन उपलब्ध है।

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