मंदसौर। अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा कानून और इसी धाराओं में किया गया बदलाव 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। इसके लिए रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम में पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 1 जुलाई से पुराने कानून IPC, CRPC और साक्ष्य अधिनियम के स्थान भारतीय न्याय संहिता (BNS)भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू होने जा रहे है।
अब तक पुलिस कार्रवाई में फारसी व उर्दू के 69 प्रचलित शब्दों को चिह्नित कर उनकी जगह हिंदी शब्दों के प्रयोग का फरमान भी पहले ही आ चुका है। अब कानून व पुलिस कार्रवाई में बदलाव होने जा रहा है। कानून की कुछ अहम धारा जो अधिक प्रचलन में है। उनमें भी बदलाव हो रहा है। ऐसे में अब कानून से जुड़े पेशे के लोगों को अपराध से जुड़ी नई धाराओं को याद करना होगा।
इन धाराओं में हो रहा बदलाव
लंबे समय से चले आ रहे कानून की धाराओं में बदलाव किया गया है । जहां हत्या के लिए धारा 302 लगाई जाती है वहां नए कानून के अंतर्गत हत्या के मामले में धारा 101 का उपयोग करना होगा। वहीं धारा 302 को अब चैन स्नैचिंग की धारा माना गया है। छेड़छाड़ की धारा 354 की पहचान अब मानहानि की धारा के तौर पर होगी।
पहले मानहानि की धारा को 499 के तौर पर जाना जाता था। धोखाधड़ी से मामले में धारा 420 की जगह अब धारा 316 की धारा लगाई जाएगी । एक जुलाई ने बदला हुआ कानून प्रचलन में होगा । पुलिस अधिकरियो को इसी के लिहाज से प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।
डिजिटल साक्ष्य भी मान्य होंगे
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 नया कानून होगा। नए कानून में 170 धाराएं हैं। जबकि 1872 के कानून में 167 धाराएं थीं। इस कानून के तहत अब अदालत में इलेक्ट्रोनिक और डिजिटल साक्ष्य पेश किए जा सकेंगे। विदेशों की तर्ज पर कोर्ट अब अपराधी को समाजसेवा से जुड़ी सजा सुना सकता है। साफ-सफाई, वृद्धाश्रम और अस्पताल में सेवा कार्य और पौधा रोपण जैसे काम सजा के तौर पर सुनाने का प्रावधान किया गया है।
रेप के मामलों की धारा भी बदलावसड़क दुर्घटना से जुड़े हिट एंड रन मामले में अब दोषी को 10 साल तक की सजा भुगतनी होगी। पहले सिर्फ दो साल की सजा होती थी। जिसे बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। नए कानून में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों का भी जिक्र है। नए कानून के तहत अब ऐसे मामलों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड का भी प्रावधान किया गया है। गैंगरेप के मामलों में बीस साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा नए कानून के तहत महिला के साथ हुए दुष्कर्म की घटना किसी भी राज्य में जीरो पर केस दर्ज करा सकेगी। बलात्कार के जो मामले अभी तक 376 के अंतर्गत आते हैं वे अब 1 जुलाई से धारा 63 के अंतर्गत आएंगे और सामूहिक दुष्कर्म के मामले अब धारा 70 के अंतर्गत आएंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाह नए कानूनों के तहत पीड़ितों और गवाहों की समस्याओं को ध्यान में रखकर कई प्रावधान किए गए हैं। अब किसी मामले में कोई गवाह घर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज करा सकेगा कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी। 7 साल से ज्यादा सजा के मामले में पुलिस हथकड़ी लगाने के लिए स्वतंत्र रहेगी।