नीमच। गौ प्रसादम् परिवार द्वारा एकादशी के पावन पर्व पर गऊ नंदी सेवा धाम नीमच पर बिमार घायल विकलांग गौ वंश के लिए एक ट्रैक्टर हरा चारा प्रसाद का भोग लगाया गया। गौ प्रसादम् परिवार पिछले करीब छः सात महीने से शहर के नजदीक अलग अलग गौशालाओं मे जाकर गौ वंशो को हरा चारा उपलब्ध करवा रहा है। गौ प्रसादम् परिवार में 180 से ज्यादा सदस्य है, जिनका मुख्य उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को गौ सेवा से जोड़ना है। गौ प्रसादम् परिवार के गौ कथा वाचक श्री दशरथानंद सरस्वती जी महाराज के संरक्षण मे संचलित हो रहा है जो राष्ट्रीय गौसेवा संघ भारत के राष्ट्रीय गौकथा प्रवक्ता एवं प्रचारक हैं।
महाराज जी का कहना है कि परिवार में किसी भी सदस्य का जन्मदिवस हो, शादी की सालगिरह, हो या किसी के घर के सदस्य की पुण्य तिथि हो अथवा कोई पर्व विशेष हो तथा एकादशी अमावस्या के उपलक्ष्य पर शहर के नजदीक की अलग अलग गौशालाओं में हरा चारा से भरा ट्रैक्टर ले जाकर गौवंशांे को अपने हाथों खिलाया जाता है, जिसमें गौ प्रसादम् परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहकर अपने हाथों सेवा करते हैं। महाराज जी ने बताया कि कोई भी दान पुण्य का कार्य गौशाला में जाकर किया जाए तो वह सौ गुना फलदाई होता है।
हमारे धर्म ग्रंथोंमें लिखा है -गृहे चौकगुणरूप्रोक्तो गोष्ठे शत गुणरूस्मृतरू।
किसी भी प्रकार का जप घर में करने से सौ गुना फल गोशाला में जप करने से प्राप्त होता है।
इसी प्रकार गोशाला में किया गया प्रत्येक दान- पुण्य अथवा पाप भी सौ गुना हो जाता है।
इसलिए गौशाला में जब भी जाएं अशास्त्रीय कार्य से बचें और जिन कार्यों को करने की शास्त्रज्ञा है वो अधिक से अधिक करने का प्रयास करें।
उन्होंने यह भी बताया कि आज हम सबके सामने अनावृष्टि, अतिवृष्टि जैसी समस्या गौवंश के दुःखी होने के कारण हीं आती है। यदि हम इस भयंकर गर्मी से बचना चाहें तो गौवंश के गोबर से निर्मित इंटों मकान बनाकर लिपाई करें तो 5 से 7 डिग्री तापमान कम हो जाता है। आने वाले समय में यदि पेड़ पौधे नहीं लगाए और गौवंश को नहीं बचाया तो यह समस्या विकराल रूप धारण कर विनाश का कारण बन सकती है।