चित्तौड़गढ़। पक्षियों की अपनी अलग और अजीब सी दुनिया है। इनके रहने के अलग-अलग तरीके होते हैं। कुछ घोंसला बनाते हैं तो कुछ दूसरे पक्षियों के घोंसले पर कब्जा कर लेते हैं। लेकिन अब स्वत्रंत्रता सेनानी गोवर्धन लाल ब्यावट की पुण्यस्मृति में उनकि धर्मपत्नी राधा देवी समाज सेविका के द्वारा चित्तौड़गढ़ में करीब 60 फीट ऊंचे घोसले तैयार किए गए हैं,इस राधा-गोवर्धन पक्षिगृह के अनावरण के दौराम परम श्रद्धेय गुरुदेव भागवत सरस पंडित हरिओम महाराज सारंगपुर वाले के मुखारबिंद से त्रिदिवसीय भक्त चारित्रम कथा का आयोजन 7 जून 2024 से 9 जून 2024 तक किया जा रहा है,इस पक्षिगृह मे जहां करीब 2 हजार पक्षियों के रहने की व्यवस्था की गई है।
गुजरात से विशेष पाटन पालनपुर के कारीगरों ने इस पक्षीघर का निर्माण किया है। यह पक्षियों की सेवा के लिए एक अभियान हैं। राधा देवी का कहना है कि वनों की कटाई के कारण पक्षियों के आवास लगातार कम हो रहे हैं, इसलिए हमने पक्षी घरों का निर्माण करवाया है,वह हमेशा समाज सेवा के कार्य में जुटी रही हैं। उनके पति स्व.गोवर्धन लाल ब्यावट स्वतंत्रता सेनानी का जन्म नवम्बर 1915 में चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर गाव में हुआ। वह साहसी एव प्रतिभाशाली व्यक्ति थे,उन्होंने सामन्ती शासकों एव अंग्रेजों की अत्याचारी नीतियों का हमेशा विरोध किया एवं स्वतंत्रता सेनानी बन गए। महात्मा गांधी के हरिजन उत्थान समझौते में 1934 में हरिजन सेवा सम्मेलन अजमेर में भाग लिया। 1938 में प्रजा मण्डल की स्थापना के पश्चात जननायक माणिक्यलाल वर्मा,चौधरी भवनी शंकर नन्दवाना के साथ साहसी सिपाही बने एवं जन जागृति एव पिछड़े वर्ग के उत्थान में प्रशाशनिक योगदान दिया। 1955-56 में भदेसर पंचायत के सरपंच रहे,स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु ब्यावट को ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया। 3 मार्च 1966 में एक दुर्घटना में उनका पैर क्षतिग्रस्त हो गया।उसके बाद वह बिना सहारे कहि आ जा नहीं सकते थे,9 जून 1994 को ब्यावट का निधन हो गया।
उनकी धर्मपत्नी समाज सेविका राधा देवी ब्यावट द्वारा स्वतंत्रता सेनानी गोवर्धन लाल ब्यावट की स्मृति में चित्तौड़गढ़ अखिल दमामी समाज छात्रावास परिसर में 60 फीट ऊँची मीनार का निर्माण कराया गया है, जहां 2 हजार पक्षियों के रहने की व्यवस्था की गई है।इस पक्षिगृह के उद्घाटन के दौरान दिनांक 7 जून 2024 से 9 जून 2024 तक छात्रावास परिसर में भक्तिमय रात्रि जागरण एव भगवान शिव अभिषेक का एव त्रिदिवसीय कार्यक्रम रखा जाएगा। इस पक्षिगृह के हर एक घोंसले में दो से तीन पक्षी रह सकते हैं। इस घोंसले को काफी सुंदर तरीके से बनाया गया है। पक्षियों के रहने के लिए यहां से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती है, यहां अनाज और पानी दोनों उपलब्ध हैं। साथ ही ये अन्य पक्षियों के शिकार से भी यहां बचकर रह सकते हैं।