नीमच। जिले में 5 जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी पर्व तक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए नमामि अभियान में अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत कलेक्टर दिनेश जैन एवं जिला पंचायत सीईओ गुरूप्रसाद के मार्गदर्शन में जिले में सभी ग्राम पंचायतों में नमामि गंगें अभियान के तहत विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से एक-एक जल सरंचनाओं तालाबों का जनभागीदारी से गहरीकाण का कार्य प्रारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत 15 जून तक जिले में जल के स्रोतों , जैसे नदी, कुएं, तालाब, बावड़ियों आदि को स्वच्छ रखने और आवश्यकता होने पर उनके गहरीकरण के लिए गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। यह कार्य जनसहभागिता से होगा।इससे जल स्रोतों के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करने और जनसामान्य का जल स्रोतों से जीवंत संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी।
कलेक्टर जैन ने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन किया जाए और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति के कार्यक्रम चलाये । इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी। पेयजल की आपूर्ति में नदियां, बावड़ियां, कुएँ व तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ष्जल ही जीवन हैष् केवल स्लोगन नहीं है, यह जल स्रोतों की हमारे जीवन में भूमिका से स्पष्ट होता है। हमारी यह पीढ़ी इन जल संरचनाओं की महत्ता से परिचित हो, हमारा संबंध जल संरचनाओं से अधिक प्रगाढ़ हो, यही इस अभियान का उद्देश्य है।
जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा-
कलेक्टर जैन ने कहा कि अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल संरचनाओं पर किये गये अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। अभियान के संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं, कि प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चलेगा जागरूकता अभियान-
कलेक्टर जैन ने कहा कि जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से कराने के साथ ही नदी, झील, तालाब, कुओं, बावड़ी आदि के पुनर्जीवीकरण/संरक्षण व संरचनाओं के उन्नयन का कार्य स्थानीय सामाजिक, प्रशासकीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी से कराया जाएंगा । प्रयास होगा कि जल संरचनाओं का उपयोग जल प्रदाय अथवा पर्यटन, भू-जल संरक्षण, मत्स्य पालन अथवा सिंघाड़े के उत्पादन के लिए भी किया जा सके। रिहायशी इलाकों में बंद पड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई कर उनके पुनरू उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। निकायों को नाले-नालियों की साफ-सफाई, वाटर ड्रेनिंग मैनेजमेंट, घाट निर्माण, वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के संबंध में भी विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर जैन ने नमामि गंगे अभियान से जुडने और जल संरक्षण ,पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने का आव्हान जिलेवासियों से किया है ।