चित्तौड़गढ़। ब्रह्मा कुमारीज प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राजयोगिनी आशा दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कम शब्दों व स्थिर मन का मनुष्य बुद्धिमान होता है मोन में रहते हुए दूसरों से सुनने का मौका ज्यादा मिलता है। उन्होंने बताया कि संत मोन रहते हैं बुद्धिमान बोलते हैं और मूर्ख बहस करते हैं और महामूर्ख हिंसा करते हैं, हिंसा शब्दों से भी होती है। उन्होंने बताया जो मेडिटेशन करते हैं वह मुख के मौन के साथ-साथ मन का मोन भी करते है। उन्होंने कहा अर्जुन ने श्री कृष्ण को शखा बनाया और विषम परिस्थितियों में विजय हुआ इस प्रकार यदि शिव को सखा बना लिया जाए तो चल रही कलयुगी परिस्थितियों में विजय बनना तय है। परमपिता परमात्मा शिव को यदि प्यार से याद किया जाए तो शांति प्रेम सुख आनंद और शक्ति की अनुभूति होती है परंतु यह याद मौन में रहने से ही लाभ देती है।