नीमच। संसार में रहते हुए किए गए पाप और पुण्य के कर्मों का फल सुख-दुख के रूप में सामने आता है। इसलिए हमें सदैव पुण्य कर्म ही करना चाहिए और पाप कर्म से सदैव बचना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। जिस प्रकार 1000 गायों में भी गाय का बछड़ा अपनी मां को पहचान लेता है ठीक उसी प्रकार पाप कर्म की सत्ता करने वाले को पहचान लेती है और उसे उसका फल अवश्य देती है। पुण्यकर्म का फल खुशी के रूप में सामने आता है और पाप कर्म का फल दुरूखों के रूप में सामने आता है। पाप कर्म को नष्ट करने की शक्ति केवल धर्म सत्ता के प्रभु के पास होती है। यदि हमें अपने जीवन का कल्याण करना है तो प्रभु की भक्ति करना चाहिए।
यह बात साध्वी सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही।वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर संघ के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन नीमच में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि यदि हमें शरीर की सभी इंद्रियां स्वस्थ मिली है तो हमें परमात्मा का धन्यवाद देना चाहिए। दुरूखों का सामना हमें धेर्य पुर्वक हंसकर करना चाहिए तो दुःख सरलता से कट जाता है। इसलिए हमारे पास दुःख आने पर हमें किसी भी व्यक्ति को दोष नहीं देना चाहिए। हमें अपने कर्मों के फल के रूप में ही उसे समझना चाहिए। सत्ता को समझे बिना जीवन का कल्याण नहीं होता है। प्रभु भक्ति से पाप कर्मों का क्षय हो सकता है शरीर में व्याधि हो और मन में समाधि हो तो आत्मा का कल्याण हो सकता है। और आत्मा दोनों अलग-अलग है आत्मा अपना घर है और शरीर पड़ोसी का घर है। शरीर और आत्मा को तेल और पानी की तरह रखना चाहिए। यदि हमने किसी भी प्रकार का पाप कर्म नहीं किया तो दुख कभी नहीं आएगा। सोने की लंका और अनेक ज्ञान का विशिष्ट विद्वान होने के बावजूद भी रावण युद्ध में श्री रामजी से पराजित हो गया था। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी इसलिए युद्ध जीत गए कि वे विनम्र रहे और रावण इसलिए युद्ध हार गया कि वह अहंकार में रहा। अंहकार पतन का मार्ग है। विनम्रता प्रगति का मार्ग है।इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक तपस्या उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हो गया है।
संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया जैन, सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रतिदिन 9 बजे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक विषयों पर विशेष अमृत प्रवचन श्रृंखला का आयोजन होगा। समस्त समाज जनअधिक से अधिक संख्या में पधार कर धर्म लाभ लेवें एवं जिन शासन की शोभा बढ़ावे।