मुरैना। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते किसानों की अब मुश्किल बढ़ती जा रही है, हालात ऐसे हैं कि, किसानों के खेत में खड़ी खरीफ की फसल भी अब इस बारिश ने बर्बाद करके रख दी है। जिससे अब साल भर से कयास लगाए बैठे किसान अब सरकार से इस बर्बाद हुई फसल को लेकर उचित मुहावजे की दरकार लग रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार के मंत्री सर्वे के आधार पर मुआवजे की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें कि, चंबल अंचल के साथ साथ प्रदेश भर में पिछले चार दिनों से झमाझम बारिश का दौर जारी है। जिस वजह से किसानों के खेत में खड़ी मक्का, बाजरा,तिल्ली, ज्वार, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द, पूरे तरीके से गल चुकी है, तो वही कुछ फसलों में पानी भरने से सड़ गई है। ऐसे में आंदता साल भर से जिन फसलों को मेहनत करके अपनी साल भर के लिए रोजी-रोटी की व्यवस्था करता था। उन्हें अब आने वाले समय में रोजी-रोटी के लाले पड़ते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि, अब किसानो के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई है। और वह सरकार की और टकटकी लगाए बैठा है, कि सरकार कब उनकी इस बारिश में बर्बाद हुई फसल का सर्वे कराए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान करें, हालांकि, सरकार के मंत्री और मुरैना के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा का कहना है कि, मुख्यमंत्री जी ने वीसी माध्यम से सभी कलेक्टर और जिले के अधिकारियों की बैठक ली है। जिसमें बारिश में बर्बाद फसलों के सर्वे के निर्देश दिए हैं कि, किसानो की जो बारिश में फसल बर्बाद हुई है। उसका मुआवजा उन्हें प्रदान किया जाए और किसानों को कोई भी हानि हुई है। चाहे वह जन हानि पशु हानि हो या धन हानि हो सभी को जल्द मुआवजा दिया जाए, और उचित मुआवजा दिया जाए। ऐसा हमने कानून बनाया है, फसल बर्बाद होने पर भी उचित मुआवजे के लिए आरबीसी 6,4 में बदलाव किया है। जिससे किसानों को ज्यादा मुआवजा मिल सके,और तो और मुर्गा मुर्गी की भी हानि होती है। तो उसमें भी मुआवजा दिया जाता है।