शहडोल। जिले के चर्चित कथित फर्जी डॉक्टर मामले में अब स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने साफ कहा है कि मामले में सिर्फ फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले व्यक्ति पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
रीवा लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते पकड़े गए कथित डॉक्टर महेश चंद्र शर्मा मामले की जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति ने कथित रूप से राजस्थान निवासी असली डॉक्टर के शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश में नौकरी हासिल कर ली। उसके नाम पर शहडोल, श्योपुर और खरगोन जिलों में पदस्थापना दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
मामले के बाद असली डॉक्टर महेश चंद्र शर्मा शहडोल पहुंचे और जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदार ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सरकारी नौकरी हासिल की। पुलिस शिकायत के आधार पर जांच कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि विभाग में किए गए डिजिटलीकरण के कारण ऐसे फर्जी मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर, सेवा समाप्ति और अब तक प्राप्त वेतन की वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों तक फर्जी तरीके से नौकरी करता रहा तो इसमें उसकी मदद करने वाले या निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं शहडोल के नवागत एसपी संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि मामले में प्राप्त शिकायतों और राजस्थान से मिल रही जानकारी के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में यदि कोई संज्ञेय अपराध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला केवल एक फर्जी डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।