बुरहानपुर। लाइफ इंश्योरेंस एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से बुधवार को एलआईसी एजेंट्स ने सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें 8 मांगें रखी गई है। सांसद ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा मैं आपकी बात पीएम तक पहुंचाऊंगा।
लाइफ इंश्योरेंस एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के मीडिया प्रभारी मनोज कुमार सुगंधी ने बताया कि देश के 14 लाख भारतीय जीवन बीमा निगम के अभिकर्ता और करोड़ों पॉलिसी धारकों के अहित में लिए गए निर्णय के विरोध में हमने ज्ञापन सौंपा। जीवन बीमा निगम प्रबंधन द्वारा एकतरफा निर्णय 1 अक्टूबर 24 से लिए गए हैं।
ज्ञापन में ये 8 प्रमुख मांगें रखी गई-
जीवन बीमा निगम प्रचारित करता है कि वह 2047 तक भारत की संपूर्ण जनसंख्या को बीमित करना चाहता है। इसके विपरीत न्यूनतम बीमा राशि एक लाख से दो लाख रूपए कर दी गई है। प्रीमियम की दर बढ़ा दी गई है। यह बदलाव ग्रामीण, निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए बीमा लेने में कठिनाई पैदा करेगा।
कमिशन की दर 1938 में निर्धारित की गई थी। जब हमारे देश में अनेक बीमा कानून लागू हुए थे। अधिनियम के अनुसार आज तक हमारी कमिशन दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई। 2013, 2017 में आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों को कमिशन दर बढ़ाने की अनुमति दी, लेकिन इन सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। निगम ने 1 अक्टूबर 2024 से पेश की जाने वाली नई नीतियों में कमिशन घटा दिया है। जो बढ़ाना चाहिए। वर्तमान में निगम की प्रीमियम दरें उच्च है। नई योजनाओं के लिए यह दरें और अधिक हो गई है जो यथावत रहना चाहिए। बोनस की दरें हर साल कम की जा रही है। उन्हें बढ़ाना चाहिए ताकि बीमा धारकों को लाभ मिल सके। उच्च प्रीमियम दरें, कम बोनस और उच्च बीमा राशि के साथ अभिकर्ता नई नीतियों के साथ विपणन कैसे कर सकते हैं। प्रवेश के समय सभी लोकप्रिय योजनाओं की आयु 50 साल कर दी गई है। इससे नए व्यवसाय करने में दिक्कत आएगी। क्लॉ बैक कमिशन एक तरह की आपत्तिजनक धारा है जिसे निगम ने पेश किया है। इसके अनुसार अभिकर्ता को पॉलिसी को सरेंडर करने के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। कमिशन का घटक प्रीमियम में शामिल होता है तो निगम क्यों भुगतान किए गए कमिशन को वसूलना चाहता है। ज्ञापन देने के दौरान इंश्योरेंस एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ठाकुर मनोहर सिंह किरार, सचिव सेकवराम मोहनानी सहित अन्य एजेंट्स मौजूद थे।