जबलपुर। हत्या, लूट जैसे ना जाने कितने संगीन अपराध करने वाले रामलाल ने अपना जीवन पूरी तरह से बदल लिया है। इनके दिमागों में कभी उपद्रव मचाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आते थे, अब वह दिमाग रंगों से मूर्ति को खूबसूरत बनाने की कल्पना कर रहा है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे रामलाल जैसे ना जाने कितने अपराधी हैं, जो अब अपराध से तौबा कर नया जीवन जी रहे हैं। कभी इनके हाथ अपराधों को अंजाम दिया करते थे, अब वो हाथ मिट्टी को आकार देने में जुटे हुए हैं।
जेल में कैदी बना रहे दीपक और मूर्तियां
केंद्रीय जेल जबलपुर दीपावली में जब रोशन होगा, तो वह इन बंदियों के हाथों से बनाए गए दीपक से रोशन होगा। जब पूजा होगी, तो वहीं लक्ष्मी जी की मूर्ति होगी, जिसे जेल में बंद कैदियों ने अपने हाथों से बनाया है। दीपावली में जेल को रोशनी से रोशन करने के लिए इन कैदियों की तैयारी दो सप्ताह से चल रही थी।
जेल प्रशासन ही इन बंदियों को कच्चा सामान उपलब्ध करवाता है, जिससे ये लोग दीपक और लक्ष्मी जी की मूर्तियां बनाते हैं। इससे ना सिर्फ उनका समय कट रहा है, बल्कि उनका मन भी शांत हो रहा है।
कभी किए थे संगीन अपराध, अब कर रहे प्रायश्चित
नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल के जेलर मदन कमलेश ने बताया कि सालों से दीपावली पर्व में जब जेल रोशन होता है, तो कैदियों के द्वारा बनाए गए दीपक से ही होता है।
कमलेश बताते है, ये वही बंदी हैं, जो कभी अपराध में लिप्त थे, और हत्या, लूट, मारपीट जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देने के कारण आज जेल में बंद हैं। पर अब ये अपने द्वारा किए गए अपराध को लेकर प्रायश्चित कर रहे हैं।
जेलर के मुताबिक, बहुत से बंदी तो ऐसे हैं जो कि अपराध से सीधे तौबा कर चुके हैं, और अधिकतर जेल में या तो अपना काम करते हैं, या फिर पूजा-पाठ करते हैं।
दीपावली पर सारा काम संभालते है कैदी
जेलर कमलेश बताते है, इस दीपावली में भी कैदियों ने हजारों दीपक बनाए हैं, जिनमें रंग किया गया है। इसके साथ ही जेल की दीवार हो या फिर बैरक या फिर गार्डन, पूरे जेल में यही बंदी पुताई भी करते हैं।
दीपावली पर्व को लेकर ये लोग खासा उत्साहित भी रहते हैं। कैदियों के द्वारा बनाए गए दीपक को बाजार में भी बेचा जाता है, जिससे कि इनकी कमाई भी होती है।
कमलेश बताते है जेल प्रशासन के द्वारा दीपावली में पूजा के बाद कैदियों को मिठाई दी जाती है। इसके बाद अगले दिन कैदियों से मिलने जब उनके परिजन आते हैं, तो इसके लिए भी विशेष व्यवस्था की जाती है। कुल मिलाकर पूरे देश के साथ उत्साह से रोशनी के पर्व को केंद्रीय जेल जबलपुर में मनाया जाता है।