मुरैना। जिले के बानमोर राम जानकी मंदिर परिसर में स्थित विद्या भारती विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में सोमवार को मात्र सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे सरस्वती शिशु विद्यालय के भैया-बहनों के उज्जवल भविष्य एवं माताओं का अपने बच्चों के प्रति सही मार्ग दर्शन के निमित कर्तव्यों को समझ हेतु एक मातृसम्मेलन का आयोजन किया गया। मंचासिन अतिथियों में मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 शिवराम दास महाराज जी वशिष्ठ अतिथि मुकुट बिहारी शर्मा मुख्य वक्ता अंजू शर्मा आमंत्रित सदस्य सुनील दीक्षित अखिलेश बंसल हरिमोहन दीक्षित अमिता शुक्ला सरस्वती शिशु स्कूल के प्रधानाचार्य रामनिवास शर्मा व्यवस्थापक डॉक्टर अवधेश गॉड उपस्थित रहे।
विद्यालय के कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य वक्ता अंजू शर्मा ने कहा कि भैया-बहनों के उज्जवल भविष्य एवं माताओं का अपने बच्चों के प्रति सही मार्ग दर्शन के निमित कर्तव्यों को समझ के लिए एक मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया उन्होंने कहा कि बच्चों को घर से दिए गए संस्कार उसके आगे बढ़ाने की दिशा निर्धारित करते हैं बच्चों को शारीरिक मानसिक बौद्धिक विकास के साथ साथ संस्कार जैसी परस्पर सहयोग की भावना की शिक्षा भी मिलती है माता उस बच्चे का पालन पोषण करती है जो मधुर फल देता है उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिलाओं को बालिकाओं के बारे में ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है मोबाइल के दुष्परिणामों से भी बच्चों को समझना चाहिए और इसका उपयोग कब किया जाना चाहिए इस पर विचार किया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही व्यक्ति उत्तम नागरिक बनता है छात्र-छात्राओं के चरित्र का निर्माण होता है माता का जीवन संस्कार में हुआ तो बच्चों को भी रामकृष्ण बना सकती है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन एवं मंगलाचरण से शुरू हुआ। अतिथियों का स्वागत गान के द्वारा हुआ। कार्यक्रम के मुख्य बिदुओं पर उद्बोधन मुकुट बिहारी शर्मा विभाग समनय ग्वालियर ने रखा। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक गान,सामूहिक नृत्य और कविता मां की ममता मोबाइल के दुष्परिणाम एवं स्वच्छता के संबंध में नुक्कड़ नाटकों के द्वारा प्रस्तुति दी वहां पर उपस्थित अतिथियों एवं माताओं को भाव विभोर कर दिया। स्कूल प्रधानाचार्य रामनिवास शर्मा ने कहा कि मातृ सम्मेलन का मुख्य उदेश्य शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी है। हम अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को भूले जा रहे हैं और बालकों का चरित्र निर्माण कैसे हो,इसी बात को लेकर 1 जून 2002 को बानमोर मे सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई थी। मुख्य अतिथि श्री शिवराम दास महाराज जी ने कहा कि मातृ शक्ति जब तक मनुष्य के साथ रहेगी वह अजेय रहेगा। माता की अराधना सबसे ज्यादा होती है परन्तु आज समाज में माता-बहनों की स्थिति क्या है यह निश्चित रूप से चितन का विषय है उन्होंने कहा कि उनके बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पड़कर देश विदेशो में नौकरियां तो कर रहे हैं लेकिन पुरानी संस्कृति को भूलते चले जा रहे हैं यह बहुत ही चिंता का विषय है इसीलिए उन्हें अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना भी अति आवश्यक है जो माता-पिता के द्वारा ही दी जा सकती हैं और इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का सीमा कटारे ने विद्या भारती शिशु विद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया और मंच का संचालन कुमारी प्रिया परिहार ने किया।