BREAKING NEWS
BIG NEWS : खुले पानी के टैंक में गिरने से 5 वर्षीय.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     BIG NEWS : नीमच में विद्युत वितरण कंपनी रविवार को.. <<     KHABAR : उर्वरक प्रतिष्ठान का औचक निरीक्षण, स्टॉक.. <<     KHABAR : पद्म पुरस्कार-2027 के लिए नामांकन आमंत्रित,.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     REPORT : डॉग बाइट से बचाव और रेबीज रोकथाम को लेकर.. <<     KHABAR : खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष.. <<     BIG REPORT : जनसुनवाई के आवेदनों का मौके पर निराकरण,.. <<     NEWS : हिंदुस्तान जिंक के स्वास्थ्य शिविरों से 1100.. <<     BIG NEWS : विशेष विमान से नीमच पहुंचे स्वामी.. <<     BIG NEWS : करंट का जानलेवा झटका, छत भराई के दौरान.. <<     KHABAR : अभी करो, अर्जेंट करो... हमें परमानेंट करो के.. <<     KHABAR : गंभीर कुपोषण से जंग जीतकर स्वस्थ हुआ शुभम,.. <<     REPORT : गंभीर कुपोषण से जंग जीतकर तृषा लौटी.. <<     शिवपुरी में बुजुर्ग को जिंदा जलाने का.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
January 1, 2025, 12:34 pm
BIG NEWS : एमपी में अभियोजन स्वीकृति के लिए नए निर्देश, लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू पुलिस की जांच के साथ नहीं होगी कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर सुनवाई, डीजीए ने लिया फैसला, पढे़ खबर  

Share On:-

भोपाल। मध्यप्रदेश में अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ चल रही लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, पुलिस की जांच के दौरान उनके अभ्यावेदन पर समानांतर जांच या सुनवाई नहीं हो सकेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागीय जांच और अभियोजन से संबंधित मामलों को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा है कि अभ्यावेदन पर सुनवाई सिर्फ तभी हो सकेगी जब शिकायत निजी तौर पर हुई हो।


सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा कि अभियोजन की स्वीकृति तभी मिलेगी जब कर्मचारियों को एक बार सुनने का मौका दिया जाएगा। उसकी बात सुने बगैर आयोजन की स्वीकृति नहीं दी जा सकेगी। ऐसे मामलों में 3 महीने के भीतर निराकरण करना होगा। केस डायरी स्टडी करने के बाद ही अभियोजन की स्वीकृति मिलेगी। इसके तहत विभाग के बजाय संबंधित विभाग के अधिकारी के पास अभियोजन की स्वीकृति के लिए डायरी भेजी जाएगी। 


इसलिए लिया गया फैसला
दरअसल, शासन के संज्ञान में आया है कि अभियोजन स्वीकृति के जारी आदेशों में तकनीकी और लिपिकीय गलतियां होती है। इस कारण अभियोजन स्वीकृति आदेश में जांच एजेंसियां संशोधन कराती है। जिससे केस कोर्ट में पेश करने में अनावश्यक विलंब होता है। अब खास ध्यान रखना होगा कि अफसर के हस्ताक्षर, सील और हर स्थान पर अपराध क्रमांक और धारा का जिक्र हो। कभी-कभी रिश्वत की राशि, रिश्वत लेने की तारीख, प्रार्थी का नाम नहीं लिखा होता है, इसे भी अधिकारी ध्यान में रखेंगे। अभियोजन स्वीकृति आदेश के रूप में होनी चाहिए।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE