नीमच। न्यूनतम वेतन देना होगा और बोल रे साथी हल्ला बोल, हल्ला बोल के नारे गुंजायमान करते हुए सेंट्रल ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन सीटू के कार्यकर्ता आज अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने नीमच कलेक्ट्रेट पहुंचे।
सीटू द्वारा प्रदेश के श्रम आयुक्त के नाम दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि निजी एवं सरकारी कार्यालय, निगम परिषद और संस्थानों में कार्यरत ठेका स्थाई, अस्थाई, दैनिक वेतन भोगी, आउटसोर्स, संविदा कर्मियों, श्रमिकों, ग्राम पंचायत में कार्यरत नल चालक और भृत्य को न्यूनतम वेतन दिए जाने का आदेश जारी किए जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि 10 वर्षों के पश्चात पुनः निरीक्षित न्यूनतम वेतन मजदूरों को अप्रैल 2024 में लागू हुआ था। किंतु चंद उद्योगपतियों द्वारा मध्य प्रदेश सरकार की उदासीनता के चलते स्टे ले लिया गया और यह वेतन लागू नहीं हो सका। संगठन द्वारा इंटर विनर बनने के पश्चात 3 दिसंबर 2024 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह स्टे समाप्त कर दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्टे समाप्त होने के पश्चात आज दिनांक तक बढ़ी हुई दर से न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है जो की अवैधानिक है और न्यायालय की तोहीन भी। सरकार द्वारा मजदूरों के अधिकारों पर कुठराघात किया जा रहा है। 25 लाख मजदूर बढ़ी हुई दर से न्यूनतम वेतन पाने से वंचित हो रहे हैं। सरकार और श्रम विभाग पर सीटू ने मजदूरों के अधिकार को सुरक्षित रखने में नाकाम होने का आरोप चस्पा किया। ज्ञापन का वाचन कृपाल सिंह मंडलोई ने किया।