जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा की नियुक्ति और लंबे समय से छात्रों के खराब परिणाम को लेकर एनएसयूआई ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में जमकर प्रदर्शन किया।
एनएसयूआई के कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े लेकर विश्वविद्यालय परिसर में घुस गए। इतना ही नहीं, जब उन्होंने कुलसचिव से बात करने की कोशिश की और वह मिलने नहीं आए, तो कार्यकर्ता जबरन उनके केबिन में घुस गए। एनएसयूआई का आरोप है कि कई छात्रों को परीक्षा देने के बावजूद जीरो नंबर दिए गए हैं। एनएसयूआई की मांग है कि छात्रों के सामने ही उनकी कॉपी की जांच की जाए, तभी यह प्रदर्शन समाप्त होगा। हालांकि इस मामले में कुलसचिव ने कहा कि कुछ बच्चों ने एग्जाम में कुछ नहीं लिखा था। मेरी कुलपति से बात हुई है।
एनएसयूआई अध्यक्ष सचिन रजक बोले ष्कुलपति जिस हिसाब से ताकतवर साबित हो रहे हैं, उसी हिसाब से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री उनके इशारे पर चल रहे हैं। यहां तक कि राजभवन भी उनके इशारे पर चल रहा है। जो कुलपति अयोग्य साबित हुआ है, अब उसके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की ऐसी स्थिति हो गई है कि पास होने वाले विद्यार्थी भी फेल हो रहे हैं। जिस विद्यार्थी ने 12वीं में 85ः अंक प्राप्त किए थे, उसे यहां जीरो नंबर मिले हैं। एक महीने से छात्र परेशान हैं। कुलपति तुरंत इस्तीफा दें, वरना एनएसयूआई यहां धरने पर बैठेगी।
छात्र बोले- एग्जाम कॉपियां हमारे सामने जांचे
कॉलेज की फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने कहा ष्हमारा एग्जाम अच्छा गया था, बावजूद इसके जीरो नंबर दिए गए। कुल 9 विषयों के पेपर हुए, जिनमें से 2 में सिर्फ 8-8 नंबर दिए गए। हमारी मांग है कि कॉपी की फिर से जांच की जाए। प्रदर्शन कर रही एक अन्य छात्रा ने बताया कि यहां ज्यादातर विद्यार्थियों को जीरो नंबर दिए गए हैं। हर किसी को 2 से 3 विषयों में जीरो नंबर दिए गए हैं।
कुलसचिव ने बताया बच्चों ने एग्जाम में कुछ नहीं लिखा, इसलिए मिले जीरो
कुलसचिव राजेंद्र कुरारिया ने कहा ष्अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद बच्चों ने मुझे ज्ञापन दिया था, जिसमें परीक्षा में कम नंबर दिए जाने की बात कही गई थी। मैंने इस मामले को संज्ञान में लिया और ज्ञापन को परीक्षा कंट्रोलर के पास भेजा। उनसे पूछा गया कि कई केंद्रों पर ऐसी समस्याएं क्यों हो रही हैं। इसके बाद मुझे जानकारी मिली कि कुछ बच्चों ने उत्तर पुस्तिका में कुछ लिखा ही नहीं था, इसलिए उन्हें जीरो नंबर दिए गए। इस संबंध में हमने कुलपति से चर्चा की है।ष्